पश्चिम एशिया में हालात सुधरने के कोई ठोस संकेत अभी दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में भारत ने पिछले 90 दिनों में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति में अहम बदलाव किए हैं। वह अब रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने के साथ-साथ ब्राजील, वेनेजुएला और अंगोला जैसे देशों से भी क्रूड मंगा रहा है। यही नहीं, अमेरिका से एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाई गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से यह अभी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही है।
समुद्री मार्ग से होने वाले परिवहन पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक मई में भारत का कच्चा तेल आयात पिछले महीने की तुलना में 10 प्रतिशत बढ़कर 49 लाख बैरल प्रति दिन हो गया, जिसमें रूस की हिस्सेदारी कुल खेप (शिपमेंट) का 38.60 प्रतिशत रही। रूस से 28 मई तक कच्चे तेल का आयात बढ़ कर 19 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया, जो इसी साल जनवरी के स्तर (पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले) की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत ज्यादा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद भारत की तेल शोधक कंपनियों (रिफाइनरी) ने रूस से तेल की खरीद बढ़ा दी है। इस रियायत के तहत देश मास्को से ऐसा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकते हैं, जिसके जहाज अभी समुद्र में फंसे खड़े हैं।
ईरान युद्ध से पहले अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और भारत एवं अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत के कारण भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात कम कर दिया था।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारतीय तेल शोधक कंपनियों ने ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रूस के साथ ब्राजील और वेनेजुएला जैसे गैर-पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। मई में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। दूसरे नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) रहा, जहां से 5,42,000 बैरल प्रति दिन का आयात किया गया।
सऊदी अरब से आयात 3,81,000 बैरल प्रति दिन रहा, जबकि ब्राजील और वेनेजुएला से क्रमशः 3,14,000 बैरल प्रति दिन और 2,90,000 बैरल प्रति दिन की आपूर्ति हुई। इराक से कच्चे तेल की आपूर्ति सीमित रही। ईरान संकट से पहले इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था।
खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का आयात मई में पिछले महीने की तुलना में बढ़ गया, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट से यातायात बाधित होने के कारण यह युद्ध पूर्व स्तर की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया। मई में एलपीजी आयात में मासिक आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 10.8 लाख टन तक पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह अमेरिका से होने वाली आपूर्ति थी, जो कुल आयात का आधा से अधिक थी।
मई में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जिसने 5 लाख टन का निर्यात किया। इसके बाद ईरान और यूएई दो बड़े आपूर्तिकर्ता रहे, जिन्होंने क्रमशः 1.4 लाख टन और 1.1 लाख टन की आपूर्ति की। यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से एलपीजी की आपूर्ति सीमित रही। मई में भारत का एलएनजी आयात भी मुख्य रूप से अमेरिका से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर रहा, जो देश के कुल गैस आयात का 38 प्रतिशत से अधिक था।
मई में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके बाद नाइजीरिया और ओमान का स्थान रहा, जबकि कतर से आयात शून्य रहा, जो हमारा पारंपरिक रूप से सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है।