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रूस बना ‘संकटमोचक’! मार्च में 9 महीने के उच्चतम स्तर पर रूसी तेल का आयात, होर्मुज संकट से बदला गणित

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पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज मार्ग बाधित होने के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस से कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है

Last Updated- March 31, 2026 | 10:23 PM IST
russia Crude oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति कमजोर होने के बीच भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात मार्च में नौ महीनों के उच्चतम स्तर 19.6 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) के स्तर पर पहुंच गया। भारत ने फरवरी में केवल 10.4 लाख बीपीडी रूसी तेल खरीदा था। समुद्री मार्गों से परिवहन पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर ने ये आंकड़े जारी किए हैं।

अमेरिका द्वारा समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीदने के लिए देशों को 30 दिनों की छूट देने के बाद भारतीय तेल शोधन (रिफाइनरी) कंपनियों ने मार्च में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी। यह छूट 11 अप्रैल तक जारी रहेगी। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा रूस पर लगाए गए विभिन्न प्रतिबंधों के कारण भारत ने दिसंबर 2025 से रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी थी। 

फरवरी में अमेरिका ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया और रूस से तेल खरीदने पर लगने वाला 25 प्रतिशत जुर्माना हटा दिया। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीदारी पूरी तरह रोकने पर सहमति जताई है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति सीमित होने से भारतीय तेल शोधक कंपनियां घरेलू ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रूस से तेल पर अत्यधिक निर्भर हैं। भारतीय तेल कंपनियां वर्तमान में रूस से तेल खरीदने के लिए लगभग 6-7 डॉलर प्रति बैरल अधिक रकम (प्रीमियम) चुका रही हैं जबकि युद्ध से पहले 8-10 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिलती थी।

भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख उपभोक्ता है और बढ़ती घरेलू मांग लेकिन स्थिर स्थानीय उत्पादन के बीच आयात पर इसकी निर्भरता 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इस बीच, मार्च में ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोकने के कारण इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे पश्चिम एशियाई देशों से भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई। होर्मुज स्ट्रेट एक महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत अपने कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत होर्मुज स्ट्रेट से प्राप्त करता है।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार इराक से भारत का कच्चा तेल आयात 30 मार्च तक लगभग 75 प्रतिशत घटकर 2,40,000 बैरल प्रति दिन रह गया जबकि पिछले महीने यह 9,69,000 बैरल प्रति दिन था। सऊदी अरब से तेल आपूर्ति में भी 43 प्रतिशत की गिरावट आई मगर अगर मार्च में अब तक यह 576,000 बैरल प्रति दिन पर स्थिर रही जबकि फरवरी में आयात 10.1 लाख बैरल प्रतिदिन था। पेट्रोलियम उत्पादों के निरंतर निर्यात के लिए सऊदी अरब ने होर्मुज स्ट्रेट को दरकिनार करते हुए अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के माध्यम से तेल निर्यात बढ़ा दिया है।

यूएई से भारत की कच्चा तेल आपूर्ति मार्च में घटकर 2,07,000 बैरल प्रति दिन रह गई जबकि फरवरी में यह 5,54,000 बैरल प्रतिदिन थी। भारत ने अंगोला से कच्चे तेल का आयात लगभग तीन गुना बढ़ाकर 3,33,000 बैरल प्रतिदिन कर दिया जबकि मार्च में अमेरिका से आपूर्ति मामूली रूप से घटकर 1,67,000 बैरल प्रति दिन रह गई। भारत का कुल कच्चा तेल आयात मार्च में घटकर 44.5 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो फरवरी में 51.7 लाख बैरल प्रति दिन था।

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First Published - March 31, 2026 | 10:23 PM IST

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