रूस से तेल की खरीद पर अमेरिका द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बीच भारत की सरकारी तेल रिफाइनरियों ने फरवरी की तुलना में मार्च में रूसी कच्चे तेल का आयात 148 प्रतिशत बढ़ा दिया। कच्चे तेल के आयात में 4 प्रतिशत की कमी के बावजूद निजी रिफाइनरियों की खरीद सहित रूस से भारत का समग्र तेल आयात पिछले महीने की तुलना में मार्च में दोगुना हो गया है।
यूरोप की थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी ऐंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘सबसे बड़ा बदलाव सरकारी रिफाइनरियों के रूस से आयात में हुआ है। इनके आयात में 148 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जो संभवतः हाजिर बाजार में रूसी तेल अधिक उपलब्ध होने के कारण हुआ है। यह भारत के आयात का प्रमुख स्रोत है।’
पिछले साल की समान अवधि की तुलना में सरकारी रिफाइनरों का रूसी कच्चे तेल का आयात मार्च में 72 प्रतिशत अधिक रहा है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत के बाद अमेरिका की ओर से छूट मिलने पर भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी। यह छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई है। युद्ध से पहले अमेरिका और यूरोपीय संघ के दबाव के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद घटा दी थी। सरकारी रिफाइनरियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन शामिल हैं, जबकि निजी कंपनियों में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और रूस समर्थित नायरा एनर्जी शामिल हैं।