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खाड़ी में युद्ध से रसोई गैस का संकट: अब अमेरिका बना भारत का सहारा, अप्रैल में हुआ रिकॉर्ड आयात

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खाड़ी संकट के कारण भारत का एलपीजी आयात अब अमेरिका पर निर्भर है। साथ ही यूएई से आपूर्ति घटने के बाद सरकार अर्जेंटीना और चिली जैसे नए विकल्प तलाश रही है

Last Updated- April 26, 2026 | 10:21 PM IST
LPG Pipeline
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने के कारण तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी या रसोई गैस) के लिए भारत अब अमेरिका से आयात में तेजी ला रहा है और वैश्विक स्तर पर विकल्प बहुत सीमित हैं। 

मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में अब तक भारत ने अमेरिका से 3,61,000 टन रसोई गैस खरीदी है, जो सर्वाधिक है। इस दौरान प्रमुख पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से आयात में तेज गिरावट आई है। 

भारत के सबसे बड़े रसोई गैस आपू्र्तिकर्ता  संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से 25 अप्रैल तक 1,63,000 टन रसोई गैस आई है, जबकि खाड़ी संकट शुरू होने के पहले फरवरी में 6,26,000 टन रसोई गैस का आयात हुआ  था।  अन्य खाड़ी देशों से भी आयात घटा है। इस महीने में सऊदी अरब से 1,38,000 टन, कतर से 87,000 टन और ईरान से 61,000 टन की खेप आई है। भारत आपूर्ति के विविधीकरण की कवायद में लगा है। लेकिन अब तक वैकल्पिक बाजारों से मामूली आयात हुआ है। अप्रैल में अब तक अर्जेंटीना से 10,000 टन और चिली से 13,000 टन की शिपमेंट हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने तक निकट अवधि में खाड़ी देशों से आयात का विकल्प तलाशना चुनौतीपूर्ण होगा। 

केप्लर के पेट्रोकेमिकल्स मैनेजर यूनुस अजौजी ने कहा, ‘भारत अपने एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत पश्चिम एशिया से प्राप्त करता रहा है। वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर बदलाव करना जल्दबाजी में नहीं हो सकता। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण बाजार में पहले से ही कमी है। ऐसे में एलपीजी किसी अन्य देश से मंगाने की कवायद करने पर माल ढुलाई और लागत और बढ़ने की संभावना है।’

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First Published - April 26, 2026 | 10:21 PM IST

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