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अमेरिका से छूट मिलने के बाद ईरान से फिर कच्चा तेल खरीदेगा भारत, रिफाइनरियों ने कसी कमर

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अमेरिकी छूट के बाद भारतीय रिफाइनरियां ईरान से कच्चा तेल खरीदने की तैयारी में हैं। इससे समुद्र में फंसी तेल की खेप बाजार में आएगी और कीमतों पर लगाम लग सकती है

Last Updated- March 22, 2026 | 10:07 PM IST
crude oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारत की रिफाइनरियां ईरान से कच्चा तेल खरीदने के लिए तैयार हैं। इस छूट के तहत विभिन्न देश ईरान का समुद्र में फंसा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकते हैं। तीन रिफाइनरियों के अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अतंर्गत काम करने वाले विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अमेरिका ने 20 मार्च तक जहाजों पर लदे ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘हम निश्चित रूप से ईरान से तेल खरीद सकते हैं लेकिन अंतिम निर्णय आ​र्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा। हम भुगतान के तरीके स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ईरान से ईंधन खरीदना भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि वहां से यहां माल बहुत जल्दी आ जाता है।

एक अन्य सूत्र ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की एक तेल मार्केटिंग कंपनी ने पहले ही ईरान से एक एलपीजी टैंकर सुरक्षित कर लिया है। हालांकि उसने मात्रा का खुलासा नहीं किया। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित भारतीय रिफाइनरियों को इस बारे में बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला। भारत ने इससे पहले 2019 में ईरान से कच्चा तेल खरीदा था। तब से अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने से बचने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से ईंधन की खरीद रोक दी थी। कैप्लर के आंकड़ों के अनुसार एक समय में ईरान का कच्चा तेल भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 11.5 फीसदी था।

कैप्लर के लीड शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘हमेशा से ही भारत ईरानी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। भारत अनुकूल वाणिज्यिक शर्तों के कारण ईरानी लाइट और हेवी ग्रेड की महत्त्वपूर्ण मात्रा आयात करता था। साल 2018 में प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद मई 2019 से आयात बंद हो गए और भारत प​श्चिम ए​शिया के अन्य देशों, अमेरिका और अन्य ग्रेड से बाकी तेल आयात करने लगा।’

ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों पर अमेरिकी छूट वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल और युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के बीच आई है। ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से माल की आवाजाही बा​धित है जबकि इस मार्ग से वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20 फीसदी खेप की आवाजाही होती है। मार्च में अब तक भारत के लिए ब्रेंट क्रूड बास्केट का दाम बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जो पिछले महीने 69 डॉलर प्रति बैरल था।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने कहा कि अस्थायी रूप से ईरानी कच्चे तेल की मौजूदा आपूर्ति को खोलकर लगभग 14 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजारों में लाया जाएगा। बेसंट ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘आज ट्रेजरी विभाग अल्पकालिक प्राधिकार जारी कर रहा है जो वर्तमान में समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देता है। फिलहाल प्रतिबंधित ईरानी तेल चीन द्वारा सस्ते दामों पर जमा किया जा रहा है।’

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First Published - March 22, 2026 | 10:07 PM IST

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