facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी तैयारी: ईरान युद्ध के बीच ओडिशा में रणनीतिक तेल भंडार परियोजना पकड़ेगी रफ्तार

Advertisement

ईरान युद्ध के बीच भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए ओडिशा के चांदीखोल में 40 लाख टन क्षमता वाला रणनीतिक तेल भंडार बनाने की प्रक्रिया तेज कर रहा है

Last Updated- March 09, 2026 | 10:22 PM IST
oil refinery
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ईरान युद्ध में हालिया तेजी के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) ने जाजपुर जिले में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार परियोजना को जल्द शुरू करने पर जोर दिया है। इसी क्रम में आईएसपीआरएल ने ओडिशा सरकार से भूमि आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।

साल 2018 में स्वीकृत इस परियोजना के तहत चांदीखोल के समीप डंकरी पहाड़ी क्षेत्र में करीब 40 लाख टन रणनीतिक तेल भंडार को 8,743 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जाना है। मगर भूमि हस्तांतरण और पत्थरों के अवैध खनन संबंधी समस्याओं के कारण इस परियोजना में देरी हुई है।

भारत फिलहाल विशाखापत्तनम (13.3 लाख टन), मंगलूरु (15 लाख टन) और पादुर (25 लाख टन) सहित तीन जगहों पर 53.3 लाख टन भूमिगत कच्चे तेल भंडारण क्षमता का संचालन करता है। इन तीनों के जरिये देश की 10 दिनों की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी हो सकती हैं।

केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चांदीखोल के अलावा कर्नाटक के पादुर में 25 लाख टन विस्तार परियोजना को भी मंजूरी दी है। इन दोनों परियोजनाओं के चालू होने के बाद भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार आपातकालीन कच्चे तेल की मांग के करीब 21 दिनों को पूरा करने में सक्षम होगा।

सूत्रों ने कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाले ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आईएसपीआरएल ने 2019 की शुरुआत में इस पहाड़ी क्षेत्र में परियोजना के लिए 400 एकड़ भूमि की पहचान की थी। मगर राज्य सरकार ने अब तक लीज डीड को अंतिम रूप नहीं दिया है और इसलिए भूमि हस्तांतरण नहीं हो पाया है।

आईएसपीआरएल के अनुसार, पिछले साल जनवरी में आयोजित एक बैठक के दौरान उच्चस्तरीय मंजूरी प्राधिकरण (एचएलसीए) से प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी। उसके बाद ओडिशा के औद्योगिक संवर्धन एवं निवेश निगम के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर उसी महीने हस्ताक्षर किए गए।

अप्रैल 2025 में ओडिशा सरकार के साथ नई दिल्ली में एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। बाद में ओडिशा औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकास निगम (इडको) ने जिला प्रशासन द्वारा भूमि जारी किए जाने के बाद भूमि लागत के रूप में 21 करोड़ रुपये की मांग की थी।

कंपनी ने जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार सभी प्रारंभिक कार्य पूरे कर लिए हैं जिसमें भूमि सर्वेक्षण और सीमांकन शामिल हैं।

निविदा दस्तावेज अंतिम सिफारिश और मंजूरी के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी अप्रेजल कमेटी (पीपीपीएसी) को भेजे गए हैं। इसलिए मुख्य परियोजना निविदा जल्द जारी होने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए इंजीनियरिंग डिजाइन को भारत सरकार के उपक्रम इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) द्वारा अंतिम रूप दिया गया है। आईएसपीआरएल के मुख्य प्रबंधक (तकनीकी) आरके जेना ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि अप्रैल तक भूमि उपलब्ध होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘आवश्यक 400 एकड़ में से इडको ने 286 एकड़ के लिए लीज डीड को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बाकी अगले दो महीनों में किया जाएगा। भूमि सौंपे जाने के बाद हम बोली प्रक्रिया शुरू करेंगे। हम उस क्षेत्र में अप्रैल से सुरक्षा की तैनाती कर देंगे। बोली के करीब 5 महीने बाद निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।’

इस बीच, कंपनी ने पत्थरों के अवैध खनन जारी रहने के मद्देनजर धर्मशाला के विधायक हिमांशु शेखर साहू से संपर्क किया है। आईएसपीआरएल ने साहू को लिखे एक पत्र में कहा, ‘राज्य सरकार से आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप और आवश्यक मंजूरी के बाद इस अटकी हुई परियोजना को फिर से शुरू किया जा सकता है।’ बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी पत्र की एक प्रति देखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आग्रह किया है कि अधिकारियों को भूमि आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने और अवैध उत्खनन को रोकने का निर्देश दिया जाए ताकि परियोजना का काम शुरू हो सके।

पिछले साल नवंबर में जाजपुर के कलेक्टर को लिखे एक पत्र में आईएसपीआरएल ने आगाह किया था कि इस क्षेत्र में लगातार हो रहे खनन जल्द से जल्द रोका न गया तो राष्ट्रीय एवं रणनीतिक महत्त्व की आगामी परियोजना खतरे में पड़ जाएगी। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र में 13 पत्थर खदानें हैं। उनमें से 8 मुकदमेबाजी के कारण ठप हैं और 4 पर काम हो रहा है। एक खदान का परिचालन नहीं हो रहा है। तीन  खदानों की पट्टा अवधि 2028 में समाप्त हो जाएगी जबकि एक अन्य खदान की पट्टा अवधि 2027 में खत्म हो रही है।

प्रस्तावित परियोजना 6 साल से अधिक समय से अटकी हुई थी लेकिन 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद उसने गति पकड़ी है।

Advertisement
First Published - March 9, 2026 | 10:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement