सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) लैटिन अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका सहित कई भौगोलिक क्षेत्रों में संपत्ति अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश कर रही है। कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक रणजीत रथ ने एक साक्षात्कार में बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। कंपनी ऐसे समय में विदेशी परिसंपत्ति पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जब भारत पश्चिम एशिया में संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति झटके का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया युद्ध ने भू-राजनीतिक झटकों के प्रति भारत की कमजोरियों को उजागर किया है और तेल व गैस के स्रोतों के विविधीकरण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।
रथ ने कहा कि ऑयल इंडिया अपने विदेशी अन्वेषण और उत्पादन (ईऐंडपी) पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पास वर्तमान में रूस, वेनेजुएला, मोजाम्बिक, लीबिया, गैबन, नाइजीरिया और बांग्लादेश सहित 7 देशों में 10 विदेशी परिसंपत्तियां हैं।
रथ ने कहा, ‘हमारा दृढ़ विश्वास है कि विदेशी संपत्ति का अधिग्रहण फायदेमंद है। इससे हमारे अन्वेषण और उत्पादन की कवायदों के लिए राजस्व मिलता है। साथ ही तेल व गैस की हिस्सेदारी में पहुंच बनती है और उसका एक हिस्सा अपने देश में लाते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि इससे हमें प्रमुख वैश्विक कंपनियों की सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच मिलती है।’
रथ का मानना है कि भारत के लिए बड़ी वाणिज्यिक खोज वक्त की जरूरत है, जिससे घरेलू उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है। भारत के कच्चे तेल का कुल उत्पादन 2025-26 में घटकर 259.8 लाख टन रह गया, जो इसके पहले के वित्त वर्ष में 264.9 लाख टन था। इसकी वजह से देश की आयात पर निर्भरता 88.7 प्रतिशत हो गई है।
ऑयल इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 तक कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर 40 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है।, जो पिछले वित्त वर्ष में 35 लाख टन था। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 में 10,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है, जो पिछले साल के 8,800 करोड़ रुपये की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। अन्वेषण की कवायदों को बढ़ावा देने के लिए ऑयल इंडिया चालू वित्त वर्ष में 100 कुओं की खुदाई करेगी, जबकि पिछले साल 74 कुओं की खुदाई हुई थी।
मुख्य रूप से एक ऑनशोर काम करने वाली ऑयल इंडिया अब गहरे पानी और बहुत गहरे पानी के अन्वेषण में तेजी लाने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग की तलाश में है। रथ ने कहा, ‘हम अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ संभावित सहयोग की तलाश कर रहे हैं क्योंकि तेल और गैस क्षेत्र में, विशेष रूप से गहरे पानी और बहुत गहरे पानी (ब्लॉक) में काम कनरे का उनका व्यावहारिक अनुभव है।’ऑयल इंडिया ने इसके पहले ब्राजील की पेट्रोब्रास के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और भारत के गहरे और बहुत गहरे अपतटीय बेसिन में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए फ्रांसीसी प्रमुख टोटाल एनर्जीज के साथ एक प्रौद्योगिकी सेवा समझौता (टीएसए) किया था।