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Energy Growth: सरकारी तेल कंपनियों ने खोला खजाना, बीते 10 महीनों में खर्च किए ₹1.07 लाख करोड़

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तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में 1.62 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि वित्त वर्ष 2024 में 1.28 लाख करोड़ रुपये खर्च किए

Last Updated- February 22, 2026 | 11:02 PM IST
Crude Oil Prices
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

तेल मंत्रालय से प्राप्त नए आंकड़ों के अनुसार भारत के तेल क्षेत्र के सरकारी उपक्रमों (पीएसयू) ने घरेलू उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तेजी से काम करते हुए जनवरी के अंत तक मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अपने लक्षित पूंजीगत व्यय का 81 प्रतिशत उपयोग कर लिया है।

हाल के वर्षों में भारत की तेल दिग्गजों का पूंजीगत व्यय बढ़ा है। तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में 1.62 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि वित्त वर्ष 2024 में 1.28 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 1.14 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे। 

पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में 1.32 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक लक्षित पूंजीगत व्यय में से 1.07 लाख करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। वर्तमान गति को देखते हुए तेल कंपनियां वित्त वर्ष 2026 में अपने लक्षित पूंजीगत व्यय को पार कर सकती हैं, बशर्ते वे अपने आवंटित पूंजीगत व्यय का पूरी तरह से उपयोग करें। 

ऑयल इंडिया (ओआईएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल), मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेम (एमआरपीएल), चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (सीपीसीएल) और इंजीनियर्स इंडिया (ईआईएल) ने अप्रैल-जनवरी की अवधि के दौरान ही अपने वार्षिक लक्ष्य पार कर लिए हैं।

वित्त वर्ष 2026 के दौरान तेल दिग्गज इंडियन ऑयल और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने क्रमशः 35,294 करोड़ रुपये और 34,900 करोड़ रुपये खर्च किए, जो सबसे ज्यादा पूंजीगत व्यय है। उसके बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 18,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 

पिछले साल तेल कंपनियों ने अप्रैल-जनवरी के दौरान 1.29 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो 1.18 लाख करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य से अधिक था।

ओएनजीसी और ऑयल इंडिया सहित भारत की अपस्ट्रीम कंपनियों ने अपने तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। साथ ही कंपनियां अपतटीय क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को बढ़ा रही हैं, जिसमें स्वाभाविक रूप से अधिक पूंजी लगती है।  तेल कंपनियां तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं क्योंकि दुनिया के चौथे सबसे बड़े रिफाइनिंग हब भारत का लक्ष्य पेट्रोलियम रिफाइनिंग के लिए खुद को एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसे सरकारी रिफाइनर अपनी मौजूदा रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल संयंत्रों की रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और साथ ही बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए नई रिफाइनरियां भी स्थापित कर रहे हैं।

एचपीसीएल ने राजस्थान के बाड़मेर जिले में 90 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता की रिफाइनरी स्थापित की है, जिसके वित्त वर्ष 2026 में चालू होने की संभावना है। बीपीसीएल आंध्र प्रदेश में एक रिफाइनरी परियोजना पर काम कर रही है। इसके अलावा इंडियन ऑयल की सहायक कंपनी सीपीएलसी  तमिलनाडु में एक रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल संयंत्र स्थापित कर रही है।

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First Published - February 22, 2026 | 11:01 PM IST

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