कतर ने भारत के लिए एक भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने का संकल्प दोहराया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के दोहा दौरे के दौरान कतर ने यह आश्वासन दिया है। कतर भारत का सबसे बड़ा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्तिकर्ता है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘कतर भारत के लिए ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने (पुरी) कतर के ऊर्जा मंत्री के साथ बैठकें कीं। कतर के ऊर्जा मंत्री ने एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने की कतर की प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत के साथ ऊर्जा संबंधों तथा सहयोग को जारी रखने और उन्हें और मजबूत होने उम्मीद जताई।’
पुरी ने 9 और 10 अप्रैल के अपने दो दिन के दोहा दौरे में कतर के ऊर्जा मंत्री व कतरएनर्जी के मुख्य कार्याधिकारी साद शेरिदा अल-काबी से मुलाकात की।
भारत की कुल गैस जरूरतों में से करीब 40 प्रतिशत आपूर्ति कतरएनर्जी करती है। कंपनी ने अपने संयंत्रों पर हमले को देखते हुए एलएनजी उत्पादन रोक दिया था। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई। कतर भारत को कच्चे तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की भी आपूर्ति करता है।
जायसवाल ने कहा कि भूराजनीतिक स्थिति की चुनौतियों के बावजूद भारत अपने पड़ोसी देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहा है। भारत ने श्रीलंका को 3.8 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की है और मॉरीशस सरकार के साथ तेल और गैस आपूर्ति के लिए समझौता किया है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय मॉरिशस के दौरे पर हैं।
बिजली मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने कहा कि भारत में गैस आधारित बिजली उत्पादन कम होता है, ऐसे में एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के बावजूद बिजली की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है।
भारत के कुल बिजली उत्पादन में गैस आधारित बिजली उत्पादन की हिस्सेदारी महज 1.4 प्रतिशत है। गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 20 गीगावॉट है और इसमें से 2.4 गीगावॉट क्षमता ग्रिड से नहीं जुड़ी हैं, जो चालू रहे। शेष संयंत्रों को भी गैस मुहैया कराई गई।
उन्होंने कहा, ‘हमने अपनी लगभग 10 गीगावॉट क्षमता वाले संयंत्र का रखरखाव अगले 3 महीनों के लिए टाल दिया है।’
हाल में गैस आधारित संयंत्रों को बिजली उत्पादन के लिए एलएनजी आयात की अनुमति दी गई थी। पिछले साल दिसंबर में 2027 से शुरू होकर 10 साल के लिए सालाना 2.7 लाख टन एलएनजी आपूर्ति के लिए टोरंट पावर ने जापान की बिजली उत्पादन कंपनी के साथ समझौता किया था।
साथ ही केंद्र सरकार ने रसोई गैस की कमी को देखते हुए इंडक्शन स्टोव के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। सरकार उम्मीद कर रही है कि इसकी बहुत अधिक स्वीकार्यता से बिजली की मांग 27 गीगावॉट और न्यूनतम स्वीकार्यता की स्थिति में 13 गीगावॉट बिजली की मांग बढ़ेगी।
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) के डायरेक्टर जनरल कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने कहा, ‘इंडक्शन कुकिंग का इस्तेमाल बढ़ने से वितरण स्तर पर एक मांग और जुड़ने की संभावना है। इससे खासकर सुबह और शाम के घंटों में मांग बढ़ सकती है।’
अप्रैल से जून 2026 के बीच भारत को 22,361 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। इसमें 3.5 गीगावॉट ताप बिजली, 10 गीगावॉट सौर ऊर्जा, 2.5 गीगावॉट पवन ऊर्जा, 750 मेगावॉट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, 3,461 मेगावॉट हाईब्रिड परियोजनाएं, 750 मेगावॉट पनबिजली और 250 मेगावॉट पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज शामिल है।