पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत ऊर्जा आपूर्ति में कमी का सामना कर रहा है। इस बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री देनिस मांतुरोव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, ताकि परस्पर लाभकारी व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग का विस्तार किया जा सके।
अपनी यात्रा के दौरान मांतुरोव ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
भारत में रूस के दूतावास ने एक बयान में कहा, ‘तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। देनिस मांतुरोव ने पुष्टि की है कि रूसी कंपनियों के पास भारतीय बाजार में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को स्थिर रूप से बढ़ाने की क्षमता है।’
उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग पर चर्चा की गई। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट आने से भारत ने ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। समुद्री इंटेलिजेंस फर्म कैप्लर के आंकड़ों के अनुसार मार्च में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात बढ़कर 9 महीने के उच्चतम स्तर 20.3 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया जो इसके पिछले महीने 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन था।
भारतीय कंपनियों को संघर्ष शुरू होने से पहले रूस से कच्चे तेल की खरीद में 8 से 10 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिलती थी मगर अब करीब 6 से 7 डॉलर प्रति बैरल अधिक दाम देने पड़ रहे हैं।
रूस का ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के दबाव के बीच भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद को कम कर रहा था। दोनों देशों के बीच हालिया दौर की बातचीत इस सिलसिले को उलट सकती है।
भारत दुनिया में कच्चे तेल के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक बना हुआ है जिसकी आयात पर निर्भरता 90 फीसदी है। भारत अपनी घरेलू खपत की करीब 50 फीसदी एलएनजी की आपूर्ति आयात से करता है। मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को निर्यात करने वाला रूस फिलहाल भारत को एलएनजी की आपूर्ति नहीं कर रहा है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार शाम को लगभग 106.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था जबकि संघर्ष से पहले यह 74 डॉलर प्रति बैरल था। इस बीच 1 अप्रैल तक भारतीय क्रूड बास्केट का दाम बढ़कर 120.84 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आज चर्चा की। मंत्रालय में सचिव नीरज मित्तल ने राज्यों को निर्देश दिया कि एलपीजी वितरण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने राज्यों को जमाखोरी एवं हेरफेर पर नजर रखने और अफवाहों पर कड़ी निगरानी बनाए रखने का भी निर्देश दिया।