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अमेरिकी टैरिफ के बीच रूस का उराल्स तेल भारत के लिए हुआ और सस्ता, ब्रेंट क्रूड से 4 डॉलर तक कम कीमत

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भारत 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के तेल का बड़ा खरीदार बन गया, लेकिन, अमेरिका ने भारत पर इस व्यापार के लिए भारी टैरिफ लगा दिए हैं

Last Updated- September 02, 2025 | 4:14 PM IST
russia Crude oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

रूस का उराल्स क्रूड तेल भारत के लिए और सस्ता हो गया है। यह तेल अब ब्रेंट क्रूड से 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। यह कीमत सितंबर के आखिर और अक्टूबर में लोड होने वाले तेल के लिए है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि यह जानकारी गोपनीय है। भारत 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के तेल का बड़ा खरीदार बन गया। लेकिन, अमेरिका ने भारत पर इस व्यापार के लिए भारी टैरिफ लगा दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके अधिकारियों की आलोचना ने भारत को रूस और चीन के करीब ला दिया है।

Also Read: ट्रंप की धमकी का असर? अप्रैल-मई में क्रूड ऑयल आयात में अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी हुई दोगुनी, रूस की घटी

भारत-रूस के बीच खास रिश्ता

चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और रूस का रिश्ता खास है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को बेहतर करने का वादा किया। इस बीच, अमेरिका के व्हाइट हाउस सलाहकार पीटर नवारो ने भारत की कड़ी आलोचना की। जवाब में, भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रूसी तेल की खरीद ने वैश्विक तेल की कीमतों को बढ़ने से रोका। उन्होंने यह बात ‘द हिंदू’ अखबार में लिखे अपने लेख में कही।

भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल खरीद रही हैं। अगस्त की शुरुआत में कुछ समय के लिए खरीद रुकी थी। लेकिन अब सस्ता उराल्स तेल फिर से आकर्षक हो रहा है। पिछले हफ्ते यह तेल ब्रेंट से 2.50 डॉलर प्रति बैरल सस्ता था। जुलाई में यह छूट सिर्फ 1 डॉलर थी।

दूसरी ओर, अमेरिकी तेल कुछ रिफाइनरियों ने प्रीमियम कीमत पर खरीदा, जो 3 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा था। 27 अगस्त से 1 सितंबर तक भारतीय रिफाइनरियों ने 1.14 करोड़ बैरल रूसी तेल लिया। इसमें एक कार्गो अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित जहाज विक्टर कोनेत्स्की से शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए आया। उराल्स तेल रूस का प्रमुख तेल है, जो इसके पश्चिमी बंदरगाहों से भेजा जाता है। चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, जो पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए तेल लेता है।

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First Published - September 2, 2025 | 3:49 PM IST

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