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अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी भारत पहुंच रहा रूसी कच्चा तेल, मध्य पूर्व के नए विक्रेताओं की हुई एंट्री

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मैरीटाइम इंटेलिजेंस एजेंसियों केप्लर और वोर्टेक्सा के डेटा से पता चला कि अभी भी कुछ कार्गो ने रूस के सबसे बड़े तेल उत्पादक प्रतिबंध वाले रोसनेफ्ट से आपूर्ति प्राप्त की है

Last Updated- December 09, 2025 | 10:28 PM IST
Russian oil imports
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के निजी क्षेत्र और सरकारी रिफाइनरियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत आपूर्ति की अंतिम तिथि 21 नवंबर के बाद भी रूस के आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल हासिल करना जारी रहा। रिफाइनिंग के सूत्रों और शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति करने वाले नए मध्यस्थ उभर आए। मैरीटाइम इंटेलिजेंस एजेंसियों केप्लर और वोर्टेक्सा के डेटा से पता चला कि अभी भी कुछ कार्गो ने रूस के सबसे बड़े तेल उत्पादक प्रतिबंध वाले रोसनेफ्ट से आपूर्ति प्राप्त की है।

बिजनेस स्टैंडर्ड को हासिल आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल के नए विक्रेता जैसे अल्गाफ मैरीन, रेडवुड ग्लोबल सप्लाई, रसएक्सपोर्ट, रूसवियतपेट्रो, नेफ्टिसा, डक्कॉर, मोरएक्सपोर्ट, ग्रीवाले हब एफजेडई और ईस्ट इम्प्लेक्स स्ट्रीम एफजेडई जैसी कंपनियां शामिल हैं। केप्लर के अधिकारी ने कहा कि डेटा लेन-देन में उपयोग किए गए लदान के बिलों में दी गई खरीदारों और विक्रेताओं की जानकारी पर आधारित है।

एनर्जी इंटेलिजेंस ने बताया कि प्राइमग्रोथ, ओरिक्स, ऑगस्टा, अमूर इन्वेस्टमेंट्स और नेक्सस (पूर्व में तेजारिनेफ्ट) सहित यूएई में रूसी कच्चे तेल के अन्य विक्रेता है। इसकी पुष्टि भारतीय रिफाइनरियों ने भी की है।

रिफाइनिंग क्षेत्र के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि नए विक्रेताओं का उदय भारत और रूस दोनों देशों के उत्पादकों और रिफाइनरियों के लिए 50 अरब डॉलर के महत्त्व को दर्शाता है। यहां तक कि रूसी तेल पर दी जाने वाली छूट 2023 के बाद से सबसे अधिक हो गई है और 2025 की शुरुआत से तीन गुना हो गई है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिमी एशिया और अमेरिका से वैकल्पिक आपूर्ति बहुत ज्यादा होने के बावजूद बहुत महंगी है।

फिनिश ऊर्जा थिंक टैंक सीआरईए के अनुसार अमेरिका ने मूल रूप से नवीनतम प्रतिबंधों में भारतीय रिफाइनरियों को रूस की बिक्री को निशाना बनाया है, वहीं यूरोपीय संघ  और चीन छूट प्राप्त रूसी कमोडिटी आपूर्ति के सबसे बड़े लाभार्थी हैं और उन्होंने रूसी युद्ध प्रयासों में अरबों डॉलर का योगदान दिया है।

सीआरईए के अनुसार फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की शुरुआत से लेकर 6 दिसंबर, 2025 तक चीन ने तेल, गैस और कोयले के आयात के लिए रूस को 288 अरब यूरो (334 अरब डॉलर) का भुगतान किया। इस क्रम में यूरोपीय संघ ने 217 अरब यूरो का भुगतान किया। भारत ने 161 अरब यूरो और तुर्की ने 117 अरब यूरो का भुगतान किया।

केप्लर के दिसंबर के शुरुआती आंकड़े से पता चलता है कि रोसनेफ्ट के 21 नवंबर के बाद भेजे गए 25 जहाज में से 16 जहाज भारत पहुंचे। इसमें से छह जहाज जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज को दिए गए और पांच पार्सल नायरा के वाडिनार संयंत्र को भेजे गए। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार शेष जहाज सरकरी कंपनियों जैसे भारत पेट्रोलियम आदि को मिले।

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First Published - December 9, 2025 | 10:28 PM IST

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