केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि सरकार पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के बढ़ते घाटे का आकलन करेगी क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने पर भी उनके दाम बढ़ाए नहीं गए हैं।
बहरहाल मंत्री ने राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद सरकार द्वारा ईंधन की कीमतें बढ़ाने की योजना की रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों का कोई संबंध नहीं है।
भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में पुरी ने कहा, ‘पिछले 4 साल में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। आखिरी बढ़ोतरी 2022 में हुई थी। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि कीमतें नहीं बढ़ेंगी। मैं कह रहा हूं कि दोनों का कोई संबंध नहीं है।’
मंत्री ने कहा कि ओएमसी प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि चालू तिमाही में ओएमसी का घाटा 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है जबकि नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
पुरी ने कहा, ‘इससे मेरी चिंता बढ़ी है। ऐसे समय भी रहे हैं, जब इन कंपनियों ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन जिस दर से हम जा रहे हैं, नुकसान की यह एक तिमाही पिछले साल के पूरे मुनाफे को खत्म कर सकती है।’
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार है, जिससे 60 दिनों तक कच्चे तेल, 60 दिनों तक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और 45 दिनों तक तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति हो सकती है। रसोई ईंधन की कमी के साथ भारत की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया संकट के पहले उत्पादन 35,000 टन प्रति दिन से एलपीजी उत्पादन को बढ़ाकर 54,000 टन प्रति दिन कर दिया गया है।