भारत की प्राइवेट सेक्टर की स्पेस लॉन्च कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने गुरुवार को लगभग 60 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की घोषणा की। इस फंडिंग के बाद कंपनी का प्री-मनी वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर पहुंच गया है और इसके साथ ही कंपनी यूनिकॉर्न बन गई है।
इस फंडिंग राउंड की अगुवाई शेरपालो वेंचर्स (Sherpalo Ventures) और वैश्विक संस्थागत निवेशक GIC ने संयुक्त रूप से किया। इसमें स्काईरूट के मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया, जिनमें ग्रीनको ग्रुप के संस्थापक और अरकम वेंचर्स शामिल हैं। शेरपालो के संस्थापक, प्रसिद्ध टेक निवेशक और अल्फाबेट इंक के बोर्ड सदस्य राम श्रीराम अब स्काईरूट के बोर्ड में शामिल होंगे।
कंपनी के निवेशकों की सूची में अब दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक (BlackRock) की ओर से मैनेज्ड फंड, टेक ग्रोथ कैपिटल फर्म प्लेबुक पार्टनर्स, शांघवी फैमिली ऑफिस और अन्य निवेशक भी शामिल हो गए हैं। नई फंडिंग से यह साफ है कि निवेशकों को स्काईरूट के दुनिया की प्रमुख स्पेस लॉन्च सर्विस कंपनियों में शामिल होने की क्षमता पर मजबूत भरोसा है।
यह नया कैपिटल स्काईरूट को विक्रम-1 लॉन्च की हाई फि्रक्वेंसी स्थापित करने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और विक्रम-2 विकसित करने में मदद करेगी। विक्रम- 2 एक एक टन कैटेगरी का लॉन्च व्हीकल होगा, जो उन्नत क्रायोजेनिक स्टेज से संचालित होगा। इससे कंपनी अलग-अलग तरह के मिशनों और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा कर सकेगी।
स्काईरूट एयरोस्पेस के को-फाउंडर और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा, “हम Vikram-1 लॉन्च को लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट होगा और भारत तथा वैश्विक स्पेस सेक्टर के लिए एक अहम उपलब्धि साबित होगा। यह निवेश दुनिया के प्रतिष्ठित निवेशकों के स्काईरूट पर भरोसे को दिखाता है।”
यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब स्काईरूट अपने विक्रम-1 की पहली उड़ान की तैयारी कर रही है। विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है और इसकी लॉन्चिंग इस घोषणा के कुछ हफ्तों बाद होने की संभावना है। यह रॉकेट वैश्विक सैटेलाइट ऑपरेटर्स को समर्पित और कस्टमाइज्ड स्पेस एक्सेस उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। यह मिशन स्काईरूट के 2022 के ऐतिहासिक मिशन पर आधारित है, जब कंपनी ने भारत का पहला निजी तौर पर निर्मित रॉकेट Vikram-S लॉन्च किया था।
Sherpalo Ventures के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर राम श्रीराम ने कहा, “मैं शुरुआती दिनों से ही स्काईरूट टीम पर भरोसा करता रहा हूं और विक्रम-1 के लॉन्च की दिशा में टीम की प्रगति ने मेरा विश्वास और मजबूत किया है। अंतरिक्ष तक पहुंच आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। स्काईरूट इस भविष्य के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है और टीम ने जो हासिल किया है वह बेहद उल्लेखनीय है।”
पवन कुमार चंदाना और नागा भारत डाका द्वारा स्थापित यह कंपनी अंतरिक्ष तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के मकसद से लॉन्च व्हीकल्स की पूरी रेज डिजाइन, विकसित और लॉन्च कर रही है। स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-S लॉन्च करके इतिहास रचा था, जो अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी तौर पर निर्मित रॉकेट था। अब कंपनी विक्रम-1 के पहले ऑर्बिटल मिशन की तैयारी कर रही है, जो भारत का पहला निजी ऑर्बिटल मिशन प्रयास होगा।
Vikram-1 को लो अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह रॉकेट ऑल-कार्बन कंपोजिट संरचना से बना है और इसमें कंपनी द्वारा विकसित सॉलिड, लिक्विड और 3D-प्रिंटेड इंजन आधारित प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है। इसे तेज मैन्युफैक्चरिंग और लगातार लॉन्चिंग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
स्काईरूट की टेक्नोलॉजी क्षमता में कार्बन कंपोजिट रॉकेट स्ट्रक्चर, सॉलिड (Kalam series), लिक्विड (Raman series) और क्रायोजेनिक (Dhawan series) प्रोपल्सन सिस्टम शामिल हैं। इन सभी का डेवलपमेंट हैदराबाद, तेलंगाना स्थित कंपनी के 2.5 लाख वर्गफुट के Max-Q और Infinity कैंपस में किया गया है।
कंपनी अब तक GIC और टेमासेक जैसे वैश्विक निवेशकों से लगभग 10 करोड़ डॉलर जुटा चुकी है। कंपनी का लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रा को हवाई यात्रा की तरह नियमित, भरोसेमंद और सस्ता बनाना है।