facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

IPL में सबसे बड़ा धमाका! राजस्थान रॉयल्स 1.65 बिलियन डॉलर में बिकी, मित्तल-पूनावाला बने नए मालिक

Advertisement

लक्ष्मी मित्तल और अदर पूनावाला के नेतृत्व में मित्तल परिवार IPL टीम राजस्थान रॉयल्स का लगभग 1.65 अरब डॉलर में अधिग्रहण करने जा रहा है।

Last Updated- May 03, 2026 | 4:41 PM IST
Rajasthan Royals
Rajasthan Royals team (File Pic)

राजस्थान रॉयल्स (RR) की मालिकाना हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लक्ष्मी एन. मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल के नेतृत्व वाला मित्तल परिवार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदर पूनावाला के साथ मिलकर इस आईपीएल फ्रेंचाइजी को खरीदने जा रहा है। यह सौदा मौजूदा मालिक मनोज बदले और उनके कंसोर्टियम से किया गया है।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे सौदे की वैल्यू करीब 1.65 अरब डॉलर यानी लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है। इस अधिग्रहण में केवल राजस्थान रॉयल्स की आईपीएल टीम ही नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़ी अंतरराष्ट्रीय टीमें भी शामिल हैं। इनमें साउथ अफ्रीका की Paarl Royals और कैरेबियन प्रीमियर लीग की Barbados Royals टीम भी शामिल हैं।

किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी

डील पूरी होने के बाद मित्तल परिवार के पास लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वहीं अदर पूनावाला करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के मालिक होंगे। बाकी 7 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास ही रहेगी, जिनमें मनोज बदले भी शामिल हैं।

मंजूरियों का इंतजार, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद

यह सौदा अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुआ है। इसे पूरा करने के लिए कई जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी। इसमें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य नियामक संस्थाओं की अनुमति शामिल है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद डील 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरी हो जाएगी।

नई बोर्ड संरचना भी तय

डील पूरी होने के बाद राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में बड़े नाम शामिल होंगे। इसमें लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनिशा मित्तल-भाटिया, अदर पूनावाला और मनोज बदले शामिल रहेंगे।

मनोज बदले टीम में पूरी तरह बाहर नहीं होंगे। वे नए मालिकाना ढांचे और मौजूदा मैनेजमेंट के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते रहेंगे।

Also Read: IPL 2026: Virat Kohli का विराट रिकॉर्ड! चेज में 4000 रन पूरे, टी20 में भी मारी लंबी छलांग

मित्तल परिवार की मजबूत एंट्री

इस निवेश समूह में मशहूर उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल और वनिशा मित्तल भाटिया शामिल हैं। इनके साथ सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला भी इस डील का हिस्सा बने हैं।

लक्ष्मी मित्तल ने कहा कि उनका राजस्थान से पारिवारिक जुड़ाव रहा है और क्रिकेट उनके जीवन का पसंदीदा खेल है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि वे राजस्थान रॉयल्स जैसी टीम से जुड़ रहे हैं।

आदित्य मित्तल ने कहा कि आईपीएल आज दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीगों में से एक बन चुका है और राजस्थान रॉयल्स इसकी सबसे प्रतिष्ठित टीमों में से एक है। उन्होंने इसे एक मजबूत और भविष्य की संभावनाओं वाली फ्रेंचाइजी बताया।

वनिशा मित्तल भाटिया ने कहा कि उनका परिवार हमेशा से खेलों और भारत से जुड़े विकास कार्यों में रुचि रखता है। इसलिए इस टीम में निवेश करना उनके लिए सम्मान की बात है।

अदार पूनावाला ने भी कहा कि वे टीम के लंबे समय के विकास और उसके विस्तार में सहयोग देने को लेकर उत्साहित हैं।

अमेरिकी कंसोर्टियम क्यों पीछे रह गया

इस डील में अमेरिका स्थित एक कंसोर्टियम भी शामिल था, जिसका नेतृत्व काल सोमानी कर रहे थे। यह समूह शुरुआत में मजबूत दावेदार माना जा रहा था। इस कंसोर्टियम से वॉलमार्ट परिवार के रॉब वॉल्टन और डिट्रॉइट लायंस की मालिक शीला फोर्ड हैम्प जैसे बड़े नाम भी जुड़े थे।

लेकिन बाद में यह समूह अंतिम डील तक नहीं पहुंच पाया। बताया गया कि लगभग 1.63 अरब डॉलर की इस संभावित डील में फंडिंग को लेकर स्पष्टता नहीं बन पाई।

इसके अलावा, संरचनात्मक चुनौतियां और नियामक प्रक्रियाओं से जुड़ी दिक्कतों ने भी इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया। तय समय सीमा के भीतर जरूरी वित्तीय प्रतिबद्धताएं पूरी न होने के कारण यह समूह पीछे रह गया।

इसी वजह से मित्तल परिवार और अदार पूनावाला के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम आगे बढ़कर इस डील के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया।

सलाहकार और डील प्रक्रिया

इस पूरी बिक्री प्रक्रिया में कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कानूनी व वित्तीय कंपनियों ने भूमिका निभाई। खरीदार समूह की तरफ से लाथम एंड वॉटकिन्स, सायरिल अमरचंद मंगलदास और त्रिलिगल ने कानूनी सलाह दी।

गोल्डमैन सैक्स ने वित्तीय सलाहकार की भूमिका निभाई, जबकि प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी ने टैक्स से जुड़ी सलाह दी।

वहीं बिक्री प्रक्रिया को रेन ग्रुप ने मैनेज किया और सलाहकार के रूप में डेलॉयट, ईवाई, मैकफार्लेंस और AZB पार्टनर्स भी शामिल रहे।

Advertisement
First Published - May 3, 2026 | 4:41 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement