facebookmetapixel
Advertisement
M&M का EV प्लान! सिर्फ नई कार नहीं, पूरी फैक्ट्री बदल रही कंपनीराज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिका

भारत पर 27 अगस्त से 50% ट्रंप टैरिफ, 55% निर्यात पर पड़ेगा असर; एक्सपोर्टर्स को लगेगा बड़ा झटका

Advertisement

वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अपने कुल निर्यात का पांचवां हिस्सा यानी करीब 86.5 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात किया था।

Last Updated- August 26, 2025 | 11:23 PM IST
India Export

भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 27 अगस्त सुबह साढ़े नौ बजे से अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लागू हो जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने इसकी पु​ष्टि की है। इससे पहले 7 अगस्त से 25 फीसदी का शुल्क प्रभावी है जिससे कुल मिलाकर अमेरिका में भारत के निर्यात पर 50 फीसदी शुल्क लगेगा। सरकार का अनुमान है कि अमेरिका को भारत से होने वाले वस्तुओं का निर्यात 55 फीसदी या 47 से 48 अरब डॉलर तक प्रभावित हो सकता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अपने कुल निर्यात का पांचवां हिस्सा यानी करीब 86.5 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का अमेरिका को निर्यात किया था।

निर्यातकों के संगठन फियो ने कहा कि तिरुपुर, नोएडा और सूरत में कपड़ा और परिधान विनिर्माताओं ने लागत प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने के कारण उत्पादन रोक दिया है। फियो ने कहा, ‘यह क्षेत्र वियतनाम और बांग्लादेश से आने वाले कम लागत वाले उत्पादों से पिछड़ रहा है। समुद्री उत्पाद, विशेष रूप से झींगे का निर्यात काफी प्रभावित होगा क्योंकि भारत से निर्यात होने वाले कुल सीफूड का 40 फीसदी अमेरिकी बाजार में भेजा जाता है। ऐसे में शुल्क वृद्धि से आपूर्ति श्रृंखला के साथ ही मछुआरों-किसानों के प्रभावित होने की आशंका है।

अमेरिकी सरकार ने कहा कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क उसके द्वारा रूसी तेल खरीद का परिणाम है क्योंकि इससे यूक्रेन युद्ध के लिए धन जुटाने में मदद मिल रही है। इस शुल्क को तीन साल से भी लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए दबाव रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

अमेरिकी प्रशासन की अ​धिसूचना के अनुसार, ‘ यह शुल्क उन भारतीय उत्पादों पर लागू होगा जिन्हें 27 अगस्त को ‘ईस्टर्न डेलाइट टाइम’ (ईडीटी) के अनुसार रात 12 बजकर एक मिनट या उसके बाद उपभोग के लिए अमेरिका लाया गया है या गोदाम से निकाला गया है।’ स्टील, एल्युमीनियम, तांबा, वाहन जैसे क्षेत्र जहां सभी देशों के लिए पहले से ही अतिरिक्त शुल्क लागू हैं और फार्मास्युटिकल्स तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को इन जवाबी शुल्क से छूट दी गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सबसे पहले 6 अगस्त को अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी और बातचीत के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी थी। इस दौरान ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के प्रधानमंत्री वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ त्रिपक्षीय बैठकें भी कीं।

भारत रूसी तेल की खरीद के संबंध में अपने रुख पर दृढ़ रहा है। भारत ने अमेरिकी शुल्क को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है और कहा कि जहां से भी सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, भारतीय कंपनियां वहां से तेल खरीदना जारी रखेंगी। अ​धिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि 50 फीसदी के भारी शुल्क के साथ अमेरिका के साथ व्यापार करना काफी हद तक संभव नहीं है।

निर्यातकों को नए बाजार तलाशने होंगे। सरकार ने निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने, निर्यात संवर्धन और निर्यात बास्केट तथा बाजार के विवि​धिकरण को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है। प्रस्तावित निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत विभिन्न सहायता योजनाओं के माध्यम से निर्यातकों की मदद को वित्त मंत्रालय से अगले एक या दो सप्ताह में मंजूरी मिल सकती है। भारत निर्यात के शीर्ष 50 देशों पर भी ध्यान दे रहा है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रिपोर्ट में कहा, ‘यह रणनीतिक झटका है जो अमेरिकी बाजार में भारत की लंबे समय से चली आ रही पकड़ को खतरे में डालता है। इससे भारत के निर्यात केंद्रों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा पैदा हो सकता है। यह वै​श्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भागीदारी को कमजोर कर सकता है। चीन, वियतनाम, मेक्सिको, तुर्किये और यहां तक कि पाकिस्तान, नेपाल, ग्वाटेमाला और केन्या जैसे प्रतिस्प​र्धियों को लाभ होने की संभावना है।’

जीटीआरआई की रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपात ऋण, अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता और लंबे समय के नुकसान को रोकने के लिए यूरोपीय संघ, यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर तत्काल ध्यान देने का आह्वान किया गया है। निर्यातकों ने कहा कि शुल्क का प्रभाव निर्यात के नुकसान के साथ ही नकदी प्रवाह पर भी पड़ेगा। तत्काल कारखानों को चालू रखने के उपाय करना और कामगारों को वेतन देना सबसे बड़ी चिंता है। निर्यातक भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क कर कर्ज को लेकर अपनी चिंता से अवगत कराएंगे।

चमड़ा, सिरेमिक, रसायन, हथकरघा और कालीन सहित अन्य श्रम बहुल क्षेत्र को भी संकट का सामना करना पड़ेगा। फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन के अनुसार इन क्षेत्रों में ऑर्डर में देरी, पहले के ऑर्डर रद्द कराने और लागत में बढ़त का लाभ खत्म होने का संकट बढ़ गया है।

Advertisement
First Published - August 26, 2025 | 11:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement