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कृषि, औद्योगिक क्षेत्र सुस्त करेंगे GDP ग्रोथ रेट में बढ़ोतरी; दूसरी तिमाही के मुकाबले Q3FY24 में तेज गिरावट का अनुमान

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India GDP growth rate: भारतीय रिजर्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी।

Last Updated- February 27, 2024 | 10:46 PM IST

औद्योगिक वृद्धि, कृषि उत्पादन और खपत में कमी के कारण वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में भारत की अर्थव्यवस्था सुस्त रह सकती है। प्रमुख संकेतकों के विश्लेषण से ये संकेत मिलते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2024 की दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के आंकड़े 6.5 प्रतिशत के आसपास रह सकते हैं, जो चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में हुई 7.6 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में तेज गिरावट है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी। वित्त वर्ष 2024 के दूसरे अग्रिम अनुमान और वित्त वर्ष 2023 के पहले संशोधित अनुमान के साथ तीसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े गुरुवार को जारी किए जाने हैं।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), बिजली की मांग, स्टील और सीमेंट की खपत जैसे संकेतकों को औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि के प्रतिरूप से रूप में देखा जा सकता है, जिसमें तीसरी तिमाही के दौरान क्रमशः 5.9 प्रतिशत, 10.2 प्रतिशत, 14.5 प्रतिशत और 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

इसी तरह से विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) दिसंबर तिमाही में गिरकर 56.8 रहा है, जो इसके पहले की तिमाही में 57.9 था।

इक्रा रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही के दौरान औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि में अनुमानित गिरावट आंशिक रूप से आधार के विपरीत असर और मात्रात्मक विस्तार में कमी की वजह से है, भले ही जिंसों के दाम में लगातार अवस्फीति कुछ क्षेत्रों के लिए फायदेमंद रहा है।’

वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही के दौरान लगातार चौथी तिमाही में कंपनी जगत में दो अंकों की उच्च वृद्धि दर दर्ज की गई है क्योंकि राजस्व में आई कमी की भरपाई अधिक मुनाफे से हो गई है।

इसी तरह से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर भी वित्त वर्ष 2023 की दिसंबर तिमाही के 4.7 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है।

बैंक आफ बड़ौदा में अर्थशास्त्री जाह्नवी प्रभाकर का कहना है, ‘खरीफ की फसल के पहले अग्रिम अनुमान से पता चलता है कि इस साल कुल मिलाकर अनाज उत्पादन पिछले साल से कम रहेगा। हालांकि रबी की बोआई का रकबा अधिक होने के कारण अगली तिमाही में कृषि क्षेत्र में कुछ रिकवरी होने की उम्मीद है।’ दिसंबर तिमाही में ग्रामीण इलाकों में खपत सुस्त हुई है, जो विभिन्न सामानों की बिक्री के आंकड़ों से पता चलता है।

इंडिया रेटिंग्स में सीनियर इकनॉमिक एनालिस्ट पारस जसराय ने कहा, ‘खपत और विलासिता पर व्यय ने पिछली तिमाही में अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। तीसरी तिमाही में त्योहारों की खरीद के अलावा कुल मिलाकर खपत सुस्त रही है। उपभोक्ता गैर टिकाऊ वस्तुओं की बिक्री 4 तिमाही के सुस्त स्तर पर रही और व्यक्तिगत ऋण में भी कमी आई है।’

इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन तीसरी तिमाही में बेहतर रहा है, जिसमें व्यापार, होटलों, ट्रांसपोर्ट और संचार सेवाओं ने अहम भूमिका निभाई है।

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First Published - February 27, 2024 | 10:46 PM IST

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