facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

कार्बन क्रेडिट तैयार करने के लिए गठजोड़

Advertisement

चार प्रमुख कंपनियों का भारतीय किसानों को पर्यावरण क्रेडिट में सशक्त बनाने का प्रयास

Last Updated- October 18, 2024 | 11:15 PM IST
Go Green, Earn Credit: Government comes out with draft rules for Green Credit Program

विश्व की चार बड़ी कंपनियां बायर, जेन जीरो (वित्तीय प्रमुख के पूर्णस्वामित्व वाली आनुषांगिक), शेल और मित्सुबिशी ने भारतीय किसानों को पर्यावरण क्रेडिट तैयार करने के लिए सशक्त बनाने का फैसला किया है। इस क्रम में भारत के नौ राज्यों में किसानों को स्मार्ट कृषि के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इन तरीकों में वैकल्पिक गीला व सुखाने (एडब्ल्यूडी) और प्रत्यक्ष बीज वाले चावल हैं।

यह परियोजना बीते एक साल से अधिक समय से प्रायोगिक तौर पर जारी है। इसमें 10,000 किसानों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं और 25,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को शामिल किया गया है। कृषि क्षेत्र में बायर और मित्सुबिशी वैश्विक नेतृत्वकर्ता हैं और शेल ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी है।

आधिकारिक बयान के अनुसार ‘द गुड राइस अलायंस’ परियोजनाओँ के तहत कृषि से सालाना आधार पर 1,00,000 टन कार्बन डाइआक्साइड के बराबर मीथेन का उत्सर्जन घटाया गया है। यह संबंधित किसानों को दिया गया है और इससे वे अतिरिक्त आमदनी कमा सकेंगे।

यह गठबंधन करीब 8,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल को शामिल करके इस कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है। इसमें धान के खेतों से जीएचजी उत्सर्जन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएंगे। इससे किसानों को मददगार और सहायता प्रणाली मजबूत होगी। कार्यक्रम क्रियान्वयन के पहले दो वर्षों के आधार पर स्केल अप का पता लगाएगा।

अभी राइस अलायंस (चावल गठजोड़) में देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। धान की पैदावार वैश्विक स्तर पर 11 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी है। मीथेन संभावित ग्रीन हाउस गैस है और इसमें कार्बन डाइआक्साइड से 27 गुना अधिक क्षमता है। वैश्विक स्तर पर होने वाली खेती में 15 प्रतिशत हिस्से पर चावल की खेती होती है और यह विश्व में 15 लाख हेक्टेयर के करीब है।

Advertisement
First Published - October 18, 2024 | 11:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement