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GST E-Way Bill: अप्रैल में ई-वे बिलों की संख्या में 12% का उछाल, आर्थिक मजबूती का मिला बड़ा संकेत

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अप्रैल 2026 में 1,333.7 लाख ई-वे बिल जेनरेट हुए, जो सालाना 12% की बढ़ोतरी दिखाते हैं। यह डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत घरेलू मांग और माल की आवाजाही को दर्शाता है

Last Updated- May 08, 2026 | 9:59 PM IST
e-way bill
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अप्रैल में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत 1,333.7 लाख ई-वे बिल बने, जो अप्रैल 2025 की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा रहे। वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) के आंकड़े के अनुसार 22 सितंबर, 2025 को जीएसटी की दरें बदले जाने के बाद अप्रैल चौथा उच्चतम मासिक आंकड़ा है।

ई-वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनरेट किया जाने वाला दस्तावेज है और यह 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के माल की आवाजाही के लिए जीएसटी व्यवस्था के तहत अनिवार्य है। इसमें माल, प्रेषक, प्राप्तकर्ता और ट्रांसपोर्टर का विवरण होता है। इसका उद्देश्य कर चोरी को रोकना है। अप्रैल का आंकड़ा सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत अधिक था और यह आंकड़ा माल की निरंतर आवाजाही व आर्थिक गतिविधियों का सूचक है। हालांकि मासिक आधार पर मार्च की अपेक्षा अप्रैल में ई वे बिल का सृजन 5.1 प्रतिशत गिर गया। 

मार्च में 1,406 लाख ई-वे बिल  का सृजन हुआ था और यह अब तक का उच्चतम मासिक आंकड़ा है। इस क्रम में दिसंबर दूसरा उच्चतम और जनवरी तीसरा उच्चतम महीना रहा। यह उल्लेखनीय है कि सरकार ने बीते साल सितंबर में जीएसटी की दरों को तार्किक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया था।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम.एस. मणि के अनुसार ई-वे बिल की संख्या आर्थिक गतिविधि के लिए अच्छा मापक है। यह दर्शाता है कि पश्चिम एशिया की स्थिति से कुछ चुनौतियां होने के बावजूद घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है।

रस्तोगी चैंबर्स के संस्थापक अभिषेक ए. रस्तोगी का कहना है कि ई-वे बिल जनरेशन में 12% की सालाना वृद्धि यह दर्शाती है कि माल की आवाजाही, आपूर्ति श्रृंखला गतिविधि और उपभोग की मांग सभी क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘मार्च से गिरावट को वर्ष के अंत में इन्वेंट्री समायोजन और मार्च के असाधारण रूप से उच्च आधार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह अधिक महत्त्वपूर्ण है कि जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद अप्रैल चौथा उच्चतम मासिक ई-वे बिल जनरेशन के रूप में उभरा है। यह अर्थव्यवस्था के निरंतर औपचारिकीकरण और मजबूत कर अनुपालन प्रवृत्तियों का संकेत देता है।’

अप्रैल के मजबूत आंकड़े वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शुरुआती संकेतक हैं, जिसमें निजी उपभोग के एक प्रमुख चालक बने रहने की उम्मीद है। इंडिया रेटिंग्स ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) में 7.6% की वृद्धि का अनुमान लगाया है।

भारतीय रिजर्व बैंक  (6.9 प्रतिशत), क्रिसिल और एसऐंडपी ग्लोबल (6.6 प्रतिशत) जैसी एजेंसियों के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के लिए समग्र वास्तविक जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान 6.5-7 प्रतिशत के बीच है। हालांकि कुछ वैश्विक संस्थान – जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) (6.5 प्रतिशत), विश्व बैंक (6.6 प्रतिशत) – पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा की कीमतों से उत्पन्न जोखिमों का हवाला देते हैं।

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First Published - May 8, 2026 | 9:52 PM IST

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