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अशोक लाहिड़ी: चुनाव विश्लेषक से नीति आयोग के उपाध्यक्ष तक, जानें दिग्गज अर्थशास्त्री का पूरा सफर

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नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी के पास मुख्य आर्थिक सलाहकार, IMF और विधायक के रूप में काम करने का अनूठा और व्यापक अनुभव है

Last Updated- April 26, 2026 | 10:07 PM IST
Ashok Lahiri
नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी

केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी के पास सरकारी और निजी क्षेत्र के साथ-साथ चुनावी राजनीति के व्यापक अनुभव का दुर्लभ मिश्रण है। कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक करने के बाद लाहिड़ी ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से पीएचडी की है। मैक्रो इकनॉमिस्ट 74 वर्षीय लाहिड़ी की प्रारंभिक समय में बौद्धिक छाप चुनाव विश्लेषण जैसे क्षेत्र में देखने को मिलती है, जो उनकी पृष्ठ​भूमि से बिल्कुल अलग है।

उन्होंने 1980 के दशक में भारतीय चुनावी आंकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए प्रणय रॉय और डेविड बटलर के साथ काम किया। इंडिया डिसाइड्स सहित अपने तमाम कामों से उन्होंने राजनीतिक टिप्प​णियों को एक छोटी सी घटना या कहानी से निकाल कर व्यापक अनुभव से सजे विश्लेषण की ओर मोड़ने में मदद की।

बाद में लाहिड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में वरिष्ठ अर्थशास्त्री और विश्व बैंक के लिए मैक्रोइकनॉमिक स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए सलाहकार के रूप में काम किया। उन्होंने भारत की राजकोषीय नीति के लिए प्रमुख थिंक टैंक के रूप में काम करने वाले नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी के निदेशक (1998-2002) के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 

वर्ष 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 12वें मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त के साथ ही लाहिड़ी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए। इस क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा तब और मजबूत हुई जब 2004 में सत्ता बदलने पर नई मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें तीन साल के लिए पद पर बरकरार रखा। यह फैसला उस समय भारत के दो धड़ों में बंटे नीति परिदृश्य में द्विदलीय भरोसे का अनूठा उदाहरण था।

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, 2003 राजग के शासन में बना था और अगली यूपीए शासन के तहत लागू हुआ। यह वित्त मंत्रालय के भीतर विश्लेषणात्मक कार्य से प्रेरित था, जिसमें लाहिड़ी ने अपना खास योगदान दिया। वह उस केलकर टास्क फोर्स में शामिल थे, जिसने इस कानून के कार्यान्वयन ढांचे को आकार दिया था।

बाद में लाहिड़ी मनीला में एशियाई विकास बैंक में कार्यकारी निदेशक बनाए गए, जहां उन्होंने क्षेत्रीय विकास वित्त के मामलों को संभाला। लाहिड़ी को 2015 में बंधन बैंक का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया। उस समय यह एक सार्वभौमिक बैंक में परिवर्तित हो रहा था। यहां उनकी भूमिका मुख्य रूप से बोर्ड स्तर पर थी, जिसमें उन्होंने शासन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण में अपना योगदान दिया।

वर्ष 2017 में उन्होंने बंधन बैंक से इस्तीफा देकर 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में काम शुरू किया, जहां उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व-साझाकरण सूत्र निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नीतिगत क्षेत्र में दशकों तक काम करने के बाद लाहिड़ी पश्चिम बंगाल की जमीनी राजनीति से सीधे जुड़ गए। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने शुरू में उन्हें अलीपुरद्वार से मैदान में उतारा था, लेकिन बाद में उन्हें बालुरघाट भेज दिया गया और यहां से उन्हें जीत मिली। यह एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के लिए अपने करियर के अंत में चुनावी राजनीति में सफलतापूर्वक प्रवेश करने का एक दुर्लभ मामला है। पार्टी ने इस बार के विधान सभा चुनाव में उन्हें मैदान में नहीं उतारा।

उनकी 2023 में प्रकाशित पुस्तक ‘इंडिया इन सर्च ऑफ ग्लोरी’ में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत में बुनियादी सेवा वितरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में कमजोरियों का सबसे बड़ा कारण इस क्षेत्र में सरकार के निवेश की कमी को दर्शाता है।  जमीनी राजनीतिक अनुभव वाले राजकोषीय अनुशासन के एक सच्चे प्रस्तावक के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह राज्यों और केंद्र के बीच एक ईमानदार कड़ी के रूप में नीति आयोग की भूमिका को पुन: परिभाषित कर पाएंगे।

नीति आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाहिड़ी से मुलाकात के बाद कहा, ‘अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति-क्षेत्र में लाहिड़ी के व्यापक अनुभव से सुधारों का मार्ग तथा ‘विकसित भारत’ बनने की यात्रा और मजबूत होगी। मुझे विश्वास है कि उनके प्रयासों से हमारे देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया और अधिक गतिशील बनेगी।’

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह ने कहा कि लाहिड़ी नीति आयोग के लिए एक उत्कृष्ट और असाधारण विकल्प हैं, जो तकनीकी कौशल को प्रशासनिक क्षमताओं के साथ जोड़ते हैं, जिनकी नीति आयोग में बहुत अ​धिक जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘लाहिड़ी को न केवल केंद्र सरकार से बल्कि राज्य सरकारों के साथ भी तालमेल से काम करना होगा। 15वें वित्त आयोग में काम करते हुए उन्हें राज्य सरकारों के वित्तीय और ऋण तंत्र का अच्छा अनुभव मिला है, जो राज्यों के आर्थिक विकास को गति देने के लिए आवश्यक है।’

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First Published - April 26, 2026 | 10:07 PM IST

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