पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित MSME और अन्य उद्योगों को राहत देने के लिए बैंकों ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन मंजूर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका मकसद प्रभावित क्षेत्रों को 2.55 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लोन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसमें भू-राजनीतिक संकट से प्रभावित एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के संयुक्त सचिव मनोज मुत्ताथिल अय्यप्पन ने बताया कि 29 मई तक बैंकों ने करीब 80,000 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिनके तहत 35,194 करोड़ रुपये के लोन मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा 15,720 करोड़ रुपये की गारंटी भी जारी की जा चुकी है।
उन्होंने कहा, “चूंकि योजना के तहत अच्छी संख्या में लोन मंजूर किए जा चुके हैं, इसलिए उम्मीद है कि ग्राहक इसका लाभ उठा सकेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल है और आवेदन से लेकर मंजूरी तक का काम 5 से 7 दिनों के भीतर पूरा किया जा सकता है।
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उन्होंने आगे कहा, “इस योजना को काफी उदार बनाया गया है, ताकि अधिकतम पात्र लाभार्थी इसका फायदा उठा सकें। केवल वे ग्राहक, जो 31 मार्च 2026 तक SMA-2 कैटेगरी में थे, उन्हें इस योजना से बाहर रखा गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में व्यापक जागरूकता और आउटरीच प्रोग्राम चलाया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाया जा सके। 18,100 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली ECLGS 5.0 योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित एयरलाइंस और MSME सेक्टर को वित्तीय सहायता प्रदान करने में मदद करेगी।
यात्री एयरलाइंस कंपनियां अपनी पीक क्रेडिट सीमा के 100 फीसदी तक, अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त लोन सुविधा पाने की पात्र होंगी। वहीं, अन्य पात्र संस्थान अपनी फंड-आधारित वर्किंग कैपिटल का 20 फीसदी तक, अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक का लोन हासिल कर सकेंगे।
इस योजना का मकसद कारोबारों को समय पर नकदी (Liquidity) उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने संचालन को सुचारु रूप से जारी रख सकें और रोजगार में कटौती की नौबत न आए। साथ ही, यह घरेलू उत्पादन को बिना किसी बाधा के बनाए रखने और कारोबारी इकोसिस्टम की मजबूती को बनाए रखने में भी मदद करेगी।
योजना के तहत बैंक पात्र उधारकर्ताओं को उनकी मौजूदा वर्किंग कैपिटल लिमिट के ऊपर 20 फीसदी तक अतिरिक्त लोन उपलब्ध करा सकते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों और कारोबारों पर पड़े दबाव को कम करने के लिए ECLGS (इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम) को पहली बार मई 2020 में शुरू किया गया था।
(PTI इनपुट के साथ)