बंबई उच्च न्यायालय ने विवाद के दौरान लंबे समय तक जब्त किया गया माल खराब होने की स्थिति में सीमा शुल्क के निर्धारण आदेश को रद्द कर दिया है। इससे आयातकों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि उच्च न्यायालय का यह हालिया फैसला आधिकारिक रूप से जब्त सामान के नष्ट या उसका मूल्य गिरने की स्थिति में विलंब और अन्य शुल्क माफ करने के लिए मिसाल कायम कर सकता है। दरअसल, बंदरगाह या टर्मिनल में एक निर्धारित समय तक सामान नि:शुल्क रखा जा सकता है। यह अवधि गुजरने के बाद सामान पर विलंब और अन्य शुल्क लगाया जाता है।
न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे के पीठ ने 6 मार्च के अपने आदेश में सीमा शुल्क के अतिरिक्त आयुक्त के जारी ऑर्डर-इन ओरिजनल को रद्द कर दिया। सीमा शुल्क के अतिरिक्त आयुक्त ने विक्टरी वेंचर्स इंक के मामले में 6 अक्टूबर, 2022 को आदेश पारित किया था।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि आदेश में सीमा शुल्क के अधिकारियों के आयातित सामान के लंबे समय तक जब्त रहने पर वर्गीकरण या मूल्यांकन विवादों में देरी होने की स्थिति में व्यापारियों पर अत्यधिक लागतों का बोझ नहीं डालने पर जोर दिया गया है। दरअसल, ऐसे विवादों में वित्तीय तेजी से बढ़ सकता है। आयातकों को विवादित सीमा शुल्क और ब्याज के अलावा अक्सर पोर्ट ऑपरेटरों को विलंब शुल्क और शिपिंग लाइनों को कंटेनर निरोध शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।
आयातक के वकील व रस्तोगी चैंबर्स के संस्थापक अभिषेक ए रस्तोगी ने कहा, ‘ये शुल्क प्रति कंटेनर रोजाना कई हजार रुपये तक हो सकते हैं। ऐसे में जब माल मुकदमेबाजी के दौरान महीनों तक जब्त रहता है तो संचयी लागत आसानी से खेप के मूल्य से अधिक हो सकती है।’
यह विवाद तब शुरू हुआ जब फर्म के एकमात्र मालिक ने आयात शुल्क में पीवीसी रोल, पीवीसी टेबल कवर और रेडीमेड जैकेट (ब्रांडेड और अनब्रांडेड दोनों) के रूप में वर्णित सामान आयात किया। सीमा शुल्क अधिकारियों ने आयात के वर्गीकरण और मूल्यांकन पर आपत्ति जताई। यह सामान 1 मार्च, 2022 को जब्त किया गया था और विवाद के दौरान सीमा शुल्क अधिकारियों की कस्टडी में रहा। बाद में आयातकर्ता ने अक्टूबर, 2022 में विभाग के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।