कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता अभी खत्म होती नहीं दिख रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और OPEC देशों के घटते उत्पादन की वजह से तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। यही कारण है कि अब कई जानकार मान रहे हैं कि तेल की कीमतें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
पिछले हफ्ते ईरान ने बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी दी थी। दुनिया के लिए यह बेहद अहम तेल मार्ग है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अगर इन रास्तों पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
तेल बाजार की चिंता सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। OPEC देशों का उत्पादन भी कई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। खासकर ईरान के उत्पादन में आई गिरावट ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। सीधी भाषा में कहें तो बाजार में तेल की सप्लाई घट रही है, जबकि मांग में कोई बड़ी कमी नहीं दिख रही।
Choice Broking का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही जल्दी सामान्य नहीं होती, तो दुनिया में रोजाना 70 लाख से 1.1 करोड़ बैरल तक तेल की कमी पड़ सकती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों को फिलहाल मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कत बनी रहती है तो डीजल के दामों पर भी दबाव बना रह सकता है। क्योंकि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और कई आर्थिक गतिविधियों में होता है। ऐसे में इसकी मांग अचानक कम नहीं होती।
Choice Broking ने FY27 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत भाव बढ़ाकर 89 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। पहले यह अनुमान 82 डॉलर था। यानी ब्रोकरेज अब मान रही है कि तेल पहले के अनुमान से ज्यादा महंगा रह सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति लंबे समय तक सामान्य नहीं होती और जुलाई के आखिर तक तनाव बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड का औसत भाव FY27 में 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यानी तेल फिर से 100 डॉलर के करीब पहुंच सकता है।
अगर तेल की सप्लाई उम्मीद से जल्दी सामान्य हो जाती है, तब भी ब्रोकरेज को नहीं लगता कि ब्रेंट क्रूड FY27 में औसतन 82 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाएगा। मतलब, अच्छे हालात में भी तेल सस्ता होने की गुंजाइश सीमित दिख रही है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)