भारत में विनिर्माण के लिए संभावनाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज देश भर में 100 विश्वस्तरीय ‘प्लग-ऐंड-प्ले’ यानी इस्तेमाल के लिए तैयार औद्योगिक पार्क बनाने के लिए 33,660 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। इसके तहत केंद्र सरकार प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक और बाहरी संपर्क के लिए बुनियादी ढांचे की लागत का 25 फीसदी तक रकम उपलब्ध कराएगी।
नई भारत औद्योगिक विकास योजना या ‘भव्य’ योजना के तहत लगभग 33,600 एकड़ भूमि पर औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे। इस योजना को राज्यों के साथ मिलकर एक चुनौती के तौर पर लागू किया जाएगा। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निजी क्षेत्र के डेवलपर भी राज्यों के जरिये अपनी परियोजना पेश कर सकते हैं। इसी प्रकार केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) भी इसके लिए अपनी परियोजना पेश कर सकते हैं।
जुलाई 2024 में पेश किए गए 2024-25 के केंद्रीय बजट में राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी के तहत 100 शहरों में सभी बुनियादी ढांचे के साथ निवेश के लिए तैयार ‘प्लग-ऐंड-प्ले’ औद्योगिक पार्कों के विकास को सुगम बनाने वाली एक योजना की घोषणा की गई थी।
परियोजना स्थल 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा और उसका चयन एक खास पैमाने के आधार पर किया जाएगा। इसमें बड़े औद्योगिक केंद्र, कौशल विकास केंद्र, बंदरगाह आदि से निकटता जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्तावों पर सरकार का जोर रहेगा। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए भूखंड का न्यूनतम आकार 25 एकड़ तय किया गया है।
इन परियोजनाओं के लिए राज्यों को एक विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी) बनानी होगी जिसके पास नियोजन एवं विकास की शक्तियां होंगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पार्क के चालू होने पर संभावित विनिर्माण इकाइयों को वहां जगह लेने और काम शुरू करने के लिए एक ही जगह सभी मंजूरियां मिल जाएं।
अधिकारी ने कहा, ‘यह योजना किसी खास क्षेत्र तक सीमित नहीं है और हमारा लक्ष्य पहले चरण में बेहतरीन बुनियादी ढांचा वाले 50 विश्वस्तरीय पार्क बनाना है। केंद्र सरकार मुख्य बुनियादी ढांचे, मूल्यवर्धित बुनियादी ढांचे, सामाजिक बुनियादी ढांचे और बाहरी कनेक्टिविटी के लिए रकम उपलब्ध कराएगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं में हरित ऊर्जा प्रणाली को भी शामिल किया जाना चाहिए।
विनिर्माण इकाइयों और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) एवं स्टार्टअप के अलावा तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे की चाहत रखने वाले वैश्विक निवेशक इस योजना के मुख्य लाभार्थी होंगे। सरकार ने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और सेवा क्षेत्र की कंपनियों, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं एवं स्थानीय लोगों के लिए व्यापार के अवसर बेहतर होंगे।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह योजना अगली पीढ़ी के औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण, कारोबारी सुगमता को बेहतर करने, भविष्य के लिए तैयार, टिकाऊ एवं कुशल औद्योगिक पार्क बनाने और निवेश, रोजगार एवं दमदार औद्योगिक परिवेश को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।