सरकार ने कोयले से गैस और उससे जुड़े दूसरे प्रोडक्ट बनाने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की इस स्कीम को हरी झंडी दी है। सरकार का मकसद देश में कोयला गैसीकरण को तेज करना है, ताकि भारत विदेशों से महंगी गैस, यूरिया और दूसरे केमिकल्स का आयात कम कर सके। सरल भाषा में समझें तो सरकार अब सिर्फ बिजली बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि कोयले से गैस और कई जरूरी उत्पाद बनाने पर भी जोर दे रही है।
कोयला गैसीकरण एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोयले को सीधे जलाने की बजाय उसे गैस में बदला जाता है। इस गैस से ईंधन, यूरिया, मेथेनॉल और कई केमिकल बनाए जा सकते हैं। सरकार का कहना है कि भारत के पास कोयले का बहुत बड़ा भंडार है। ऐसे में अगर देश अपने ही कोयले से गैस और केमिकल बनाएगा, तो विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार अब ऐसी तकनीकों पर जोर दे रही है, जिससे भारत विदेशों से कम सामान खरीदे और ज्यादा चीजें देश में ही बनें। उनके मुताबिक, लक्ष्य यही है कि भारत धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता घटाए और खुद मजबूत बने।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और महंगे कच्चे तेल-गैस की वजह से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने FY2025 में LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथेनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। अब सरकार चाहती है कि इन चीजों का ज्यादा उत्पादन देश में ही हो।
सरकार इस योजना के तहत नई परियोजनाओं को आर्थिक मदद देगी। अगर कोई कंपनी कोयले से गैस बनाने का प्लांट लगाती है, तो उसे मशीनरी और प्लांट लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है। किसी एक परियोजना को अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये तक की मदद दी जाएगी। सरकार ने कंपनियों को 30 साल तक कोयला आपूर्ति की गारंटी देने का भी फैसला किया है, ताकि कंपनियां लंबे समय के लिए निवेश कर सकें।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से 2.5 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आ सकता है। इसके साथ ही करीब 50,000 लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि ज्यादातर प्रोजेक्ट्स कोयला वाले राज्यों और इलाकों में लग सकते हैं, जिससे वहां रोजगार और कारोबार बढ़ सकता है।
सरकार का मानना है कि इससे देश का आयात बिल कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके अलावा अगर भारत खुद गैस और केमिकल बनाना शुरू करता है, तो दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा। सरकार का कहना है कि इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार ने कहा है कि इस योजना में घरेलू तकनीक इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। यानी कोशिश सिर्फ गैस बनाने की नहीं, बल्कि भारत में इससे जुड़ी पूरी तकनीक और उद्योग को मजबूत करने की भी है।