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‘दबाव में नहीं लिए फैसले’, CBIC प्रमुख ने सीमा शुल्क सुधारों पर दी सफाई, बताया क्यों घटे टैरिफ

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सीबीआईसी प्रमुख ने बजट में सीमा शुल्क रियायतों को किसी बाहरी दबाव के बजाय क्षेत्र-विशेष की प्राथमिकताओं का परिणाम बताया है

Last Updated- February 03, 2026 | 11:27 PM IST
Vivek Chaturvedi
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी | फोटो क्रेडिट: CBIC

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बजट के बाद मोनिका यादव और असित रंजन मिश्र के साथ बातचीत में सरकार की सीमा शुल्क रियायतों का बचाव करते हुए कहा कि वे बहुत संतुलित और सूक्ष्म दृष्टिकोण का नतीजा हैं और किसी बाहरी दबाव के बजाय क्षेत्र विशेष की प्राथमिकताओं का नतीजा हैं।

क्या आप बजट में सीमा शुल्क में किए गए बदलावों के पीछे की वजह समझा सकते हैं?

हमने सीमा शुल्क रियायतों के मामले में बहुत संतुलित और सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाया है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए उन वस्तुओं को सीमा शुल्क में रियायत दी गई है जिनकी जरूरत परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में पड़ती है। लीथियम-आयन सेल के निर्माण हेतु बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए पूंजीगत वस्तुओं पर, इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त मैग्नेट के लिए मोनाजाइट पर और सौर ग्लास पैनलों के लिए सोडियम एंटिमोनेट पर किसी मेगावाट की सीमा नहीं लगाई गई है।  सभी उपाय उद्योग जगत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं ताकि सस्ते आयात से बचाव हो सके और उद्योग जगत को अधिक प्रतिस्पर्धी तथा मजबूत बनाने के लिए शुल्क मुक्त कच्चे माल की इजाजत दी जा सके।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अहम पूंजीगत वस्तुओं और रणनीतिक कच्चे माल पर से शुल्क को हटाया जाना अमेरिका के रुख के अनुकूल है। क्या इसका संबंध ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क से है?

इसके पीछे का तर्क क्षेत्र विशेष को ध्यान में रखकर तैयार किया गया बारीक तर्क है। इनका कुछ संबंध हो सकता है लेकिन यह इकलौता कारक नहीं है।

क्या इन रियायतों के लिए कोई सनसेट क्लॉज (समापन प्रावधान) है?

हमने लगभग 124 सशर्त छूट अधिसूचनाओं की व्यापक समीक्षा की है। इनमें से 102 मामलों में छूट को जारी रखा गया है और मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है, क्योंकि इनकी समय-समय पर समीक्षा होती रहती है। 22 प्रविष्टियां इस मार्च में समाप्त हो रही हैं।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में बिक्री की इजाजत  के पीछे क्या विचार है?

एसईजेड मुख्य रूप से निर्यात के लिए बनाए गए हैं। वैश्विक चुनौतियों के कारण निर्यात नहीं हो रहा है और क्षमताएं रिक्त हैं। इनका उपयोग करने के लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण मौजूद है, और निर्मित वस्तुओं को बाजार की आवश्यकता है। इसलिए विचार यह है कि एसईजेड इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में बाजार तक पहुंच प्रदान की जाए। साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि घरेलू निर्माताओं के लिए भी समान अवसर उपलब्ध हों, जिन्होंने पूंजी निवेश किया है।

शुल्क को लेकर क्या बदलाव किए गए हैं और वर्तमान संरचना क्या है?

हमारे पास आठ अलग-अलग स्लैब हैं। हमने इनमें कोई बदलाव नहीं किया है। शुल्क पक्ष में हमने कुछ उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। पहला है टैरिफाइजेशन यानी एक सीमा शुल्क अनुसूची जिसमें दरें निर्धारित की जाती हैं ताकि व्यापार को पूर्वानुमान और स्पष्टता मिल सके। दूसरा, लगभग 140 नई टैरिफ लाइनों का निर्माण किया गया है ताकि वर्गीकरण विवादों को सुलझाया जा सके। तीसरा, छूट अधिसूचनाओं की समीक्षा जो उपयोग में नहीं थीं उन्हें समाप्त होने दिया गया है, जबकि अन्य को वार्षिक समीक्षा के अधीन रखा गया है।

क्या आठ-स्लैब संरचना को और अधिक तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है?

हमने इसकी समीक्षा केवल पिछले वर्ष ही की थी। यह एक होने की अवस्था में है और हमें सतर्क रहना होगा।, चूंकि यह केवल पिछले वर्ष ही बदलाव किया गया था, इसलिए तत्काल कोई बदलाव नहीं है।

जब व्यवसाय मुकदमेबाजी में हों, तो अधिकृत प्रामाणिक आर्थिक परिचालन प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को सीबीआईसी कैसे संबोधित कर रहा है?

प्रमाणन प्रक्रिया व्यापक है क्योंकि सरकार प्रामाणिक आर्थिक परिचालन संस्थाओं पर उनकी साख और अनुपालन के संदर्भ में महत्वपूर्ण भरोसा करती है। आगे चलकर हम लाभों का विस्तार कर रहे हैं। शुल्क स्थगन अब महीने में एक बार उपलब्ध होगा, पहले यह दो बार होता था। निर्माता-आयातकों की एक नई श्रेणी को आमंत्रित किया जाएगा और उन्हें लगभग वही लाभ दिए जाएंगे जो प्रामाणिक आर्थिक परिचालन को मिलते हैं।

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First Published - February 3, 2026 | 11:27 PM IST

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