वित्त वर्ष 2026 में 55 मंत्रालयों और विभागों में से 50 में केंद्र का खर्च संशोधित अनुमान से कम रहा है। इसकी वजह से कुल व्यय संशोधित अनुमान 49.65 लाख करोड़ रुपये से 59,690 करोड़ रुपये कम रहा।
बजट आवंटन के मामले में शीर्ष 10 मंत्रालयों में संशोधित अनुमान और अनंतिम व्यय के बीच सबसे बड़ा अंतर वित्त मंत्रालय में आया है, जहां खर्च अनुमान से 39,335 करोड़ रुपये कम रहा। इसके बाद वित्त वर्ष 2026 के दौरान जल शक्ति मंत्रालय में संशोधित अनुमान से 19,331 करोड़ रुपये कम व्यय हुआ।
कई अन्य मंत्रालयों ने भी इस वित्त वर्ष के दौरान खर्च में उल्लेखनीय कटौती की है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बजट से 6,893 करोड़ रुपये कम खर्च किए। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय (4,967 करोड़ रुपये), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (4,913 करोड़ रुपये), ग्रामीण विकास मंत्रालय (3,984 करोड़ रुपये), और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (3,849 करोड़ रुपये) रहे।
हालांकि कुछ मंत्रालयों ने अपने संशोधित खर्च के लक्ष्यों को पार कर लिया। सबसे तेज वृद्धि रसायन और उर्वरक मंत्रालय के खर्च में हुआ, जहां अनंतिम व्यय बजट के संशोधित अनुमान से 26,677 करोड़ रुपये अधिक था। इसके बाद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लक्ष्य से 18,595 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया।
भले ही केंद्र की प्राप्तियां अनुमान से कम रहीं, अनुमान से कम खर्च के कारण वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटा 15.58 लाख करोड़ रुपये संशोधित अनुमान से घटकर 15.19 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
वित्त वर्ष 2026 के दौरान राजकोषीय घाटे में 39,323 करोड़ रुपये की कमी से पता चलता है कि सरकार संभवतः राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य पूरा कर चुकी है। शुक्रवार को एक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जब सांख्यिकी मंत्रालय वित्त वर्ष 2026की जीडीपी वृद्धि के अनंतिम अनुमान जारी करेगा।