केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजधानी में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की दो साल की योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत बस और ट्रक मालिकों को स्वच्छ ईंधन इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसका वित्तपोषण आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) करेगा, जबकि इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
इस योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत उन ट्रक और बस मालिकों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिनके वाहन बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले हैं। उन्हें ऐसे पुराने वाहनों की जगह बीएस-6 या उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले नए वाहन अथवा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना से करीब 2.07 लाख वाहनों को लाभ मिलने की संभावना है। केंद्र सरकार 5,041 करोड़ रुपये का योगदान करेगी, जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान राज्यों द्वारा लगभग 1,600 करोड़ रुपये के कर रियायत दी जाएंगी।
योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा पांच साल के लिए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सबवेंशन, 4,800 रुपये मासिक ईंधन वाउचर और ईवी खरीद पर एकमुश्त लाभ उपलब्ध होंगे। राज्य सरकारें नई गाड़ियों के लिए पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी और 10 साल तक नए वाहनों पर 100 प्रतिशत तथा पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत मोटर वाहन कर में छूट देंगी। पुराने वाहनों की बकाया देनदारी भी माफ की जाएगी। इसके अलावा ऑटो निर्माता एक्स-शोरूम कीमतों पर 8 प्रतिशत की छूट देंगे।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि योजना का उद्देश्य किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं है। लेकिन यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि दिल्ली सरकार ने इस साल नवंबर से बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
मई में प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान ट्रक मालिक संगठनों ने कहा था कि इस कदम से ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होगा। परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा का दावा था कि उनके विश्लेषण में दिल्ली जैसे कम गति और कम यातायात घनत्व वाले क्षेत्रों में बीएस-4 और बीएस-6 ट्रकों के उत्सर्जन में कोई खास अंतर नहीं पाया गया। हालांकि अब परिवहन क्षेत्र सरकार की इस सहायता योजना का स्वागत कर रहा है, लेकिन पुराने वाहनों के भविष्य को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन इस नीति के प्रभावों का अध्ययन कर रही है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि सभी प्रोत्साहनों को जोड़ने पर कुल लाभ वाहन लागत का लगभग 22 प्रतिशत बनता है, जो पुराने बेड़े को बदलने की भारी लागत को देखते हुए पर्याप्त नहीं है।
सरकार ने पिछले साल नीति आयोग के एक अध्ययन के जरिए पाया कि ईवी अधिकतर दो, तीन और चार पहियों वाले वाहनों में ही उपयोग हो रहे थे, जबकि वायु प्रदूषण में सबसे अधिक योगदान बस और ट्रक दे रहे थे। अध्ययन में यह भी पता चला कि फ्लीट मालिक ईवी में बदलाव नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें वाहन खरीदने के लिए पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल रही थी।