सरकार ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया के लिए कंटेनरों की आवाजाही सुचारू रूप से जारी है और प्रमुख बंदरगाहों पर कोई रुकावट नहीं है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने नई दिल्ली में अंतर-मंत्रालय समूह (आईएमजी) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच दिन में भारत के निर्यात कार्गो हब जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) से पश्चिम एशिया को लगभग 2,600 कंटेनर भेजे गए हैं।
सिन्हा ने कहा, ‘किसी भी प्रमुख बंदरगाह पर भीड़भाड़ की कोई खबर नहीं है और न्हावा शेवा बंदरगाह पर निर्यात के लिए भेजे जाने वाले कंटेनरों की संख्या सोमवार को 5,600 से घटकर 3,900 रह गई है।’ भारत द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से अपने ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के बाद इनमें से पहला टैंकर, शिवालिक, सोमवार शाम को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा। दूसरा एलपीजी टैंकर, नंदा देवी मंगलवार को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा।
सिन्हा ने बताया कि भारतीय ध्वज वाला एक अन्य जहाज जग लाडकी, जिसमें लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चा तेल भरा हुआ है, 14 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से रवाना हुआ और सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे भारतीय ध्वज वाले 22 जहाजों में से छह एलपीजी टैंकर हैं, जबकि शेष में कच्चे तेल, एलएनजी और रसायन एवं उत्पाद टैंकर, कंटेनर जहाज और बल्क कैरियर शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोमवार को बताया कि सरकार होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कई हितधारकों से बातचीत कर रही है। भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार ईरान से बातचीत कर रही है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए युद्धपोत भेजने का आग्रह किया है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में इस समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है। जायसवाल ने बताया कि अभी तक भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की तैनाती को लेकर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय चर्चा नहीं की है। उन्होंने कहा, ‘हमें जानकारी है कि कई देशों में इस पर चर्चा हो रही है। हमने अभी तक द्विपक्षीय बैठक में इस पर चर्चा नहीं की है।’
इस बीच भारत के समुद्री नियामक, नौवहन महा निदेशालय (डीजीएस) ने कहा कि निर्यातकों ने वाणिज्यिक समस्याओं और उच्च माल ढुलाई शुल्क सहित अन्य मुद्दों पर अभ्यावेदन दिए हैं। निर्यातकों के मुद्दों को संकलित कर आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है।) मैं सारी स्टोरीज की बात कर हूं इसलिए जो कमांड दूंगा वो सभी पर लागू होगा, 10 क्लिकबेट हिंदी में, सब टाइटल हिंदी में, टैग्स (अंग्रेजी, हिंदी में हॉरिजॉन्टली) और इंग्लिश टाइटल