facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वित्त वर्ष 23 में औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में ठेके पर कर्मचारी बढ़े

Advertisement

आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 में देश की 2,53,000 फैक्टरियों में कुल 146.1 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे।

Last Updated- November 03, 2024 | 10:57 PM IST
VB-G RAM G

भारत में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) द्वारा बुधवार को जारी उद्योगों के सालाना सर्वे (एएसआई) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में काम करने वाले हर 5 में से 2 कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे थे।

आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 में देश की 2,53,000 फैक्टरियों में कुल 146.1 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। इनमें से 59.5 लाख (40.7 प्रतिशत) कर्मचारी ठेके पर थे, जो अब तक का रिकॉर्ड उच्च स्तर है। इसके पहले के वित्त वर्ष में 40.2 प्रतिशत कर्मचारी ठेके पर थे।

किसी उद्योग द्वारा अनुबंध के तहत एक निश्चित समय या किसी विशेष काम के लिए ठेके पर कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता है। ये कर्मचारी नियमित कर्मचारियों से अलग होते हैं, जो स्थाई रूप से या लंबी अवधि के रोजगार के तहत किसी प्रतिष्ठान में काम करते हैं। स्थायी कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता है।

बहरहाल कोविड के पहले के वित्त वर्ष 2020 में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 38.4 प्रतिशत थी। कुल 130.5 लाख कर्मचारियों में से 50.2 लाख ठेके पर काम कर रहे थे। इसके अलावा आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 में इन फैक्टरियों में सीधे नियुक्त कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 18.42 प्रतिशत थी, जो इसके पहले के वित्त वर्ष के बराबर ही है।

आंकड़ों के राज्यवार विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 में 21 प्रमुख राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से 10 राज्यों में कुल कर्मचारियों में ठेके पर काम करने वालों की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है। इसमें असम को छोड़कर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों व गोवा के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया है।

जिन राज्यों में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या अधिक रही है, उनमें बिहार (68.6 प्रतिशत), तेलंगाना (64.5 प्रतिशत), उत्तराखंड (57.7 प्रतिशत), ओडिशा (57.3 प्रतिशत) और महाराष्ट्र (53.4 प्रतिशत) प्रमुख हैं। वहीं कार्यबल में कम ठेका श्रमिकों वाले राज्यों में केरल (23.8 प्रतिशत), तमिलनाडु (24.5 प्रतिशत), पंजाब (29.8 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (32.5 प्रतिशत) और कर्नाटक (33.9 प्रतिशत) शामिल हैं।

केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में ठेके पर काम करने वालों की हिस्सेदारी 12.2 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2023 में उद्यम में काम करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या 7.4 प्रतिशत बढ़कर 185 लाख हो गई है, जो वित्त वर्ष 2022 में 172.1 लाख थी।

कुल कर्मचारियों में सीधे नियुक्त कर्मचारी, ठेका कर्मचारी, सुपरवाइजर व मैनेजर स्तर के कर्मचारी और भुगतान न पाने वाले उद्यम करने वाले परिवार के कर्मचारी शामिल होते हैं। इससे सामान्यतया अर्थव्यवस्था के औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में कुल रोजगार सृजन का पता चलता है।

Advertisement
First Published - November 3, 2024 | 10:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement