facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

देश की स्टील मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी 16.1 करोड़ टन के पार

Advertisement

सिन्हा ने कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार है और अगले 10 साल में इसके सालाना आठ से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

Last Updated- November 07, 2023 | 1:10 PM IST
Steel Metal sector
Representative Image

देश की इस्पात विनिर्माण क्षमता 16.1 करोड़ टन को पार कर चुकी है और उद्योग लगातार वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस्पात सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने मंगलवार को यह बात कही। राष्ट्रीय इस्पात नीति के अनुसार, भारत का 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात विनिर्माण क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।

सिन्हा ने राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय इस्पात संघ (आईएसए) के चौथे इस्पात सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम पहले ही 16.1 करोड़ टन क्षमता पार कर चुके हैं। इसमें ब्लास्ट फर्नेस-बेसिक ऑक्सिजन फर्नेस (बीएफ-बीओएफ) के जरिये 6.7 करोड़ टन, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) से 3.6 करोड़ टन और इंडक्शन फर्नेस (आईएफ) के जरिये 5.8 करोड़ टन क्षमता शामिल है।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश का इस्पात उद्योग लगातार वृद्धि की राह पर है। सिन्हा ने कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार है और अगले 10 साल में इसके सालाना आठ से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र की सालाना वृद्धि दर सात से आठ प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वजह से दोनों क्षेत्रों में इस्पात की मांग बढ़ रही है। सिन्हा ने कहा कि इस्पात क्षेत्र में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) बेहतर तरीके से आगे बढ़ रही है। उद्योग ने इसके तहत 29,500 करोड़ रुपये में से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस्पात सचिव ने कहा कि इस क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन और वैश्विक बाजार की मांग से संबंधित महत्वपूर्ण चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

यह भी पढ़ें : Fitch ratings: भारतीय अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि में वृद्धि दर 6.2% रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि उद्योग की दीर्घावधि की स्थिरता और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय लक्ष्यों को पाने के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाना, हितधारकों के साथ सहयोग और हरित व्यवहार को अपनाना जरूरी हो जाता है।

यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) पर उन्होंने कहा कि इसने इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा, ‘‘सामान्य रूप से इस्पात विनिर्माण में कॉर्बन उत्सर्जन को कम करने की काफी गुंजाइश है।’’

Advertisement
First Published - November 7, 2023 | 12:59 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement