facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

चालू वित्त वर्ष में 4.5% के आसपास रह सकती है महंगाई दर, क्रिसिल ने जताया अनुमान

Advertisement

रेटिंग कंपनी ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति मई में मामूली रूप से घटकर 4.75 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2024 में 4.8 प्रतिशत थी।

Last Updated- June 14, 2024 | 3:17 PM IST
inflation

अग्रणी रेटिंग एवं आर्थिक शोध कंपनी क्रिसिल (CRISIL) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में मुद्रास्फीति (Inflation) के औसतन 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

क्रिसिल ने कहा, ‘‘ मानसून की सामान्य स्थिति को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी आएगी, जबकि गैर-खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है। जिंस कीमतों में नरमी के कारण इसके नरम बने रहने की उम्मीद है।’’

रेटिंग कंपनी ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति मई में मामूली रूप से घटकर 4.75 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2024 में 4.8 प्रतिशत थी।

क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ गैर-खाद्य श्रेणियों ने मुख्य मुद्रास्फीति को नीचे खींचा है, लेकिन चिंता की बात यह है कि खाद्य श्रेणियों अनाज तथा दालों में लगातार वृद्धि हो रही है।’’

क्रिसिल ने कहा कि शहरी अर्थव्यवस्था को सख्त ऋण शर्तों से नियंत्रित किया जा सकता है। हाल के महीनों में बैंक खुदरा ऋण वृद्धि में कमी आई है, जबकि एनबीएफसी को बैंक ऋण देने पर प्रतिबंध लगाने के विनियामक उपायों का असर उपभोक्ता ऋणों पर भी पड़ेगा।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ सरकार के अच्छे पूंजीगत व्यय के बावजूद, राजकोषीय समेकन के कारण इसके पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने का अनुमान है।’’

इसमें कहा गया कि धीमी वैश्विक वृद्धि से वस्तु निर्यात में वृद्धि बाधित हो सकती है, जिससे इस वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर घटकर 6.8 प्रतिशत रह जाएगी, जो पिछले वर्ष 8.2 प्रतिशत थी।

Advertisement
First Published - June 14, 2024 | 3:17 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement