Crude Oil Outlook: दुनिया के बाजारों में इस वक्त जबरदस्त हलचल है और इसकी बड़ी वजह है ईरान से जुड़ा बढ़ता तनाव। हालात ऐसे बन गए हैं कि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर टिक गई हैं, डॉलर मजबूत हो गया है और गैस की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। सबसे बड़ा झटका सप्लाई को लग रहा है, क्योंकि दुनिया का अहम तेल रूट होरमुज जलडमरूमध्य अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। ऊपर से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी अटक गई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। ऐसे माहौल में बाजार में डर और सतर्कता दोनों साफ नजर आ रहे हैं।
बुधवार को WTI कच्चा तेल 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा। इससे पहले इसमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई थी। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि ईरान ने बातचीत में हिस्सा ही नहीं लिया। दूसरी तरफ, होरमुज जलडमरूमध्य में रुकावट बनी हुई है, जो दुनिया के लिए तेल सप्लाई का बहुत बड़ा रास्ता है। हालांकि सीजफायर को बढ़ाया गया है, लेकिन तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। अनुमान है कि इस हालात में रोजाना 4 से 5 मिलियन बैरल तक की मांग प्रभावित हो सकती है, जिसका सबसे ज्यादा असर एशिया पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका में नेचुरल गैस की कीमत गिरकर 2.67 डॉलर प्रति MMBtu पर आ गई। इससे पहले लगातार पांच दिनों तक इसमें तेजी देखी जा रही थी। उत्पादन घटकर 108.2 bcfd पर आ गया है, जो 11 हफ्तों का निचला स्तर है। वहीं LNG की सप्लाई बढ़कर 18.9 bcfd तक पहुंच गई है, जो रिकॉर्ड के करीब है। इसके बावजूद गैस के भंडार अभी भी औसत से करीब 7 प्रतिशत ज्यादा हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। साथ ही, मिडवेस्ट इलाके में गर्म मौसम की वजह से मांग कम होने की संभावना है।
डॉलर इंडेक्स 98.3 के ऊपर बना हुआ है। ईरान के साथ बातचीत टूटने के बाद निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं और इससे डॉलर को मजबूती मिली है। होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि फिलहाल हमले टाल दिए गए हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के संभावित सदस्य केविन वार्श ने सख्त रुख के संकेत दिए हैं, जिससे डॉलर को और सपोर्ट मिला है।