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Crude oil imports: भारत में फिर बढ़ा अमेरिकी तेल का आयात, रूस को नये तरीके से मिल रही चुनौती

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कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह बढ़ती बाजार हिस्सेदारी से रूस को नुकसान हो सकता है।

Last Updated- September 04, 2024 | 4:49 PM IST
Crude Oil

भारत में कच्चे तेल की बाजार हिस्सेदारी के लिए रूस और पश्चिम एशिया के बीच मुकाबला जारी है, लेकिन इस बीच अमेरिका चुपचाप अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। उद्योग सूत्रों और शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में भारत के कच्चे तेल बाजार में अपनी हिस्सेदारी को दोगुना कर लिया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह बढ़ती बाजार हिस्सेदारी से रूस को नुकसान हो सकता है। रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर है।

शिप-ट्रैकिंग डेटा के आधार पर ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ की कैलुकेशन के अनुसार, भारत ने अगस्त 2024 में अमेरिका से 1 अरब डॉलर से अधिक का तेल खरीदा। अमेरिका ने इस साल रूस के हल्के और कम सल्फर वाले तेल, जिसे ‘स्वीट क्रूड’ कहा जाता है, पर प्रतिबंध लगाए, जिससे भारतीय रिफाइनर दूसरे विकल्प ढूंढने पर मजबूर हुए। इनमें से ज्यादातर विकल्प अमेरिका से लिए गए। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी WTI मिडलैंड तेल की सप्लाई में इस साल 24% की वृद्धि हुई है और यह 1.28 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) हो गई है।

अगस्त में अमेरिका से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो 3.71 लाख बैरल प्रति दिन थी। यह जुलाई के मुकाबले 40% अधिक और पिछले साल की तुलना में दोगुनी थी। अगस्त में अमेरिका का भारतीय कच्चे तेल के मिश्रण में हिस्सा 8.3% रहा, जो पिछले साल 3.7% था। अमेरिकी तेल का अधिक आयात करने से वॉशिंगटन को भी संतुष्ट किया जा सकता है, क्योंकि वह रूस से भारत के तेल आयात की आलोचना करता रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तेल खरीद के फैसले मुख्य रूप से आर्थिक लाभ के आधार पर होते हैं।

वर्तमान में, अमेरिका से भारत को भारी कनाडाई कच्चे तेल की सप्लाई भी बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण रिफाइनिंग मार्जिन हैं। कनाडाई भारी तेल की कीमतें यूरोप के ब्रेंट कच्चे तेल की तुलना में 10 डॉलर प्रति बैरल तक कम हैं, लेकिन भारत में केवल रिलायंस इसे नियमित रूप से प्रोसेस कर सकती है। अगस्त में अमेरिका से भेजे गए कुल तेल में 35% हिस्सा कनाडाई तेल का था, जबकि बाकी हिस्सा हल्के और कम सल्फर वाले तेल का था।

मुंबई स्थित ऊर्जा विशेषज्ञ आर. रामचंद्रन के अनुसार, भारतीय रिफाइनर समय-समय पर अमेरिकी स्वीट क्रूड उठाते हैं, खासकर तब जब उन्हें मुंबई हाई या रूसी स्वीट क्रूड को बदलने की आवश्यकता होती है। अमेरिका ने पिछले साल दिसंबर से प्रीमियम रूसी तेल ग्रेड जैसे सोकोल पर प्रतिबंध लगाया, जिससे भारतीय रिफाइनरों को अमेरिका और नाइजीरिया से तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा, अगस्त में अमेरिकी स्वीट ग्रेड में वृद्धि का एक और कारण रिफाइनरियों में कुछ इकाइयों के रखरखाव हो सकते हैं, जो स्वीट क्रूड की अधिक खपत करते हैं। 2021 में भारत में अमेरिकी कच्चे तेल का आयात चरम पर था, जो 4.10 लाख बैरल प्रति दिन था, और 2020 की तुलना में इसमें 67% की वृद्धि हुई थी।

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First Published - September 4, 2024 | 4:48 PM IST

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