तेल बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का विफल होना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ती टकराव की स्थिति है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.60 डॉलर यानी करीब 7.98 प्रतिशत बढ़कर 102.80 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं अमेरिकी कच्चा तेल WTI 8.31 डॉलर यानी 8.61 प्रतिशत बढ़कर 104.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को दोनों बेंचमार्क में गिरावट दर्ज की गई थी।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत नाकाम रही है। इसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे ईरान से जुड़े तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी शुरू करेगी। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब दो हफ्ते से चल रहा सीजफायर भी खतरे में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, सोमवार से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य तेल उत्पादक देशों की सप्लाई को भी प्रभावित कर सकता है। इससे पहले से ही दबाव में चल रहे तेल बाजार में और कमी आ सकती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती है, तो ईरान के सहयोगी देशों और ग्राहकों पर दबाव बढ़ेगा कि वे इस रास्ते को फिर से खोलने के लिए कदम उठाएं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
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ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कहा है कि कोई भी सैन्य जहाज अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास आता है, तो उसे सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तनाव के बीच शनिवार को तीन बड़े तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरे। ये सीजफायर के बाद खाड़ी से निकलने वाले पहले जहाज माने जा रहे हैं। हालांकि सोमवार को इस क्षेत्र में ज्यादा जहाज नजर नहीं आए और सिर्फ एक ईरान का जहाज वहां खड़ा दिखा।
इधर सऊदी अरब ने कहा है कि उसने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की पूरी क्षमता बहाल कर दी है, जो करीब 70 लाख बैरल रोजाना है। यह कदम ईरान के साथ तनाव के दौरान ऊर्जा क्षेत्र को हुए नुकसान के बाद उठाया गया है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)