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फिलहाल देश में डायग्नोस्टिक उद्योग का मूल्यांकन 14 से 15 अरब डॉलर है और यह सालाना 13 से 14 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

Last Updated- January 02, 2025 | 3:53 PM IST
Lal PathLabs to increase penetration in western India
प्रतीकात्मक तस्वीर

छोटे शहरों में डायग्नोस्टिक जांच की मांग तेजी से बढ़ रही है। लिहाजा, डायग्नोस्टिक सेवा क्षेत्र के संगठित भागीदार इन बाजारों में ज्यादा पैठ बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। रेडक्लिफ लैब्स के मुख्य कार्याधिकारी आदित्य कंडोई के अनुसार मझोले और छोटे शहर और कस्बों में कारोबार 25 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है, जबकि महानगरों में 10 प्रतिशत (अधिक आधार के कारण) की दर से इजाफा हो रहा है।

मोटे अनुमानों के अनुसार मझोले और छोटे शहरों की डायग्नोस्टिक का उद्योग के राजस्व में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। शेष हिस्सेदारी बड़े शहरों की है। जहां मेट्रो बाजार 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, वहीं छोटे शहर 25 प्रतिशत या उससे अधिक की दर से बढ़ रहे हैं। कंडोई को लगता है कि दो से तीन वर्षों के भीतर बड़े शहरों और छोटे शहरों के बीच राजस्व का हिस्सा 50:50 अनुपात में हो जाएगा।

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फिलहाल देश में डायग्नोस्टिक उद्योग का मूल्यांकन 14 से 15 अरब डॉलर है याने 128578 करोड़ रुपये का है,  और यह सालाना 13 से 14 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। इस श्रेणी (लैब में 15 प्रतिशत और रेडियोलॉजी में 10 प्रतिशत) में संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है। साल 2030 तक देश में 14 करोड़ और परिवार मध्य वर्ग में आ जाएंगे। स्वास्थ्य सेवा पर अतिरिक्त खर्च भी तीन से चार गुना बढ़ने की उम्मीद है। मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर का बोझ साल 2030 तक 22.6 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

हेल्थकेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट है कि नीति आयोग ने जिन जिलों को पहचाना है, उनमें 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे हैं जहां आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी है और डायग्नोस्टिक श्रृंखलाएं सेवा प्रदान करती हैं। एजिलस डायग्नोस्टिक्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी आनंद का मानना है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी से मझोले और छोटे शहरों में डायग्नोस्टिक सेवाओं तक पहुंच और बढ़ रही है।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘एजिलस डायग्नोस्टिक्स के 70 प्रतिशत ग्राहक इन शहरों में हैं जो हमारे कुल राजस्व में 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं। हम उन 25 राज्यों में और अधिक विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, जहां हम पहले से ही हैं। भविष्य के हमारे विस्तार का 60 प्रतिशत हिस्सा मझोले और छोटे शहरों में होगा।’

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इसी तरह मझाेले और छोटे शहरों ने वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही तक मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के राजस्व में लगभग 34 प्रतिशत का योगदान दिया है। फिलहाल मेट्रोपोलिस 700 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। उसका एक खासा हिस्सा मझोले और छोटे शहरों में है। कंपनी अगले 12 से 18 महीनों में 1,000 से अधिक कस्बों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रही है जिससे इन क्षेत्रों में उसका नेटवर्क और मजबूत होगा।

मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के मुख्य कार्याधिकारी सुरेंद्रन चेम्मनकोटिल ने कहा, ‘अकेले छोटे शहरों के राजस्व में ही पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि हुई है,जो कंपनी की समूची वृद्धि रणनीति में इन बाजारों के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। यह दमदार वृद्धि स्वास्थ्य सेवा जागरूकता में बढ़ोतरी, स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में विस्तार और छोटे शहरों में विशेष डायग्नोस्टिक सेवाओं की बढ़ती जरूरतों जैसे कारकों से प्रेरित है।’

मेट्रोपोलिस ने लगभग 50 प्रतिशत नई लैबोरेटरी इन क्षेत्रों में शुरू करने की योजना बनाई है। मझोले और छोटे शहरों में उसकी पहले से ही 46 लैब हैं। वह वित्त वर्ष 25 में 25 अतिरिक्त नई लैब शुरू करने जा रही है।

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First Published - December 25, 2024 | 10:14 PM IST

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