माल एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) से जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में ईवे बिल का सृजन सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़कर 13.26 करोड़ हो गया है। हालांकि जनवरी के 13.68 करोड़ की तुलना में यह कम है, लेकिन यह ईवे बिल सृजन का अब तक का तीसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।
जीएसटी दरों में 22 सितंबर 2025 से कमी किए जाने के कारण दिसंबर में ईवे बिल सृजन बढ़कर रिकॉर्ड 13.84 करोड़ पर पहुंच गया था।
ईवे बिल इलेक्ट्रॉनिक रूप से सृजित दस्तावेज होता है। जीएसटी व्यवस्था में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं की आवाजाही के लिए ईवे बिल अनिवार्य है। इसमें कंसाइनमेंट, कंसाइनर, कंसाइनी और ट्रांसपोर्टर का ब्योरा होता है। इसे टैक्स चोरी रोकने के लिए डिजाइन किया गया है, साथ ही यह सामान की रियल-टाइम ट्रैकिंग भी करता है, चाहे वह एक राज्य के भीतर माल की आवाजाही हो, या एक राज्य से दूसरे राज्य में।
प्राइसवाटरहाउस में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि फरवरी में ईवे बिल के सृजन में तेज बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों की गति जारी रहने के संकेत मिलते हैं। इसमें 18.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि से खपत मांग और जीएसटी अनुपालन व्यवस्था में सुधार के संकेत मिलते हैं। जैन ने कहा, ‘ईवे बिल लगातार उच्च स्तर पर बने रहने से आपूर्ति श्रृंखला की गतिविधियों में स्थिरता का पता चलता है और इससे आने वाले महीनों में बेहतरीन जीएसटी संग्रह हो सकता है।’
डेलॉयट में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि ईवे बिल सृजन में मजबूत वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की सतत गति का पता चलता है।
उन्होंने कहा, ‘पिछले महीने की तुलना में ईवे बिल में थोड़ी कमी आई है, लेकिन इसमें सालाना आधार पर 19 प्रतिशत वृद्धि से बेहतर मांग और जीएसटी ढांचे में आपूर्ति श्रृंखला के औपचारीकरण जारी रहने के संकेत मिलते हैं।’