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Economic Survey 2026: इनकम टैक्स और कस्टम्स में बीच तालमेल जरूरी, कंपनियों को दोहरी जांच से मिलेगी राहत

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव से कागजी कार्यवाही और कानूनी चक्कर कम होंगे, जिससे भारत निवेश के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले काफी आगे निकल जाएगा

Last Updated- January 29, 2026 | 3:27 PM IST
TAX
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में इनकम टैक्स और कस्टम डिपार्टमेंट के बीच बेहतर तालमेल की सलाह दी गई है। खासकर तब जब कंपनियां अपने ही ग्रुप की विदेशी कंपनियों से सामान इंपोर्ट करती हैं। सर्वे का कहना है कि इससे कंपनियों का कंप्लायंस का झंझट कम होगा, झगड़े घटेंगे और भारत मैन्युफैक्चरिंग के लिए दुनिया का पसंदीदा ठिकाना बन सकता है।

एक ही डील पर दोहरी जांच की मुसीबत

सर्वे के एक्सटर्नल सेक्टर वाले हिस्से ‘प्लेइंग द लॉन्ग गेम’ में इस बात को उठाया गया है कि ग्लोबल वैल्यू चेन में काम करने वाली कंपनियों को एक बड़ी दिक्कत होती है। रिलेटेड पार्टी इंपोर्ट्स यानी ग्रुप कंपनियों के बीच होने वाले इंपोर्ट पर इनकम टैक्स और कस्टम्स दोनों अलग-अलग नजर रखते हैं।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों से यह देखता है कि इंपोर्ट की कीमत ज्यादा तो नहीं दिखाई जा रही, जिससे प्रॉफिट बाहर न जा सके। वहीं कस्टम डिपार्टमेंट का फोकस इस पर रहता है कि कीमत कम तो नहीं बताई गई, जिससे ड्यूटी कम चुकानी पड़े। दोनों ही नियम ‘आर्म्स लेंथ’ सिद्धांत पर टिके हैं, जो OECD और वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गेनाइजेशन के मानकों से जुड़े हैं।

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लेकिन समस्या यह है कि एक ही इंपोर्ट डील पर दोनों डिपार्टमेंट अपनी-अपनी जांच करते हैं। इससे कंपनियों को दो बार डॉक्यूमेंट्स दिखाने पड़ते हैं, खर्च बढ़ता है और कभी-कभी फैसले अलग-अलग भी आ जाते हैं।

सर्वे ने कहा है कि दोनों डिपार्टमेंट्स के वैल्यूएशन के तरीके काफी मिलते-जुलते हैं। इसलिए एक साथ मिलकर काम करने का अच्छा मौका है। इसके लिए एक मजबूत ढांचा बनाया जाए, जिसमें वैल्यूएशन के नियम एक जैसी हों, जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी एक जैसे मांगे जाएं और जांच भी मिलजुल कर हो।

क्या होगा इसका फायदा?

सर्वे में दावा किया गया है कि ऐसा करने से बिजनेस को ज्यादा भरोसा मिलेगा, फैसले एक समान होंगे और सरकार की कमाई भी सुरक्षित रहेगी। इससे कंप्लायंस का बोझ हल्का होगा, विवाद कम होंगे, क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड में साफ-सफाई बढ़ेगी और भारत में बिजनेस करना और आसान हो जाएगा।

एक्सपर्ट्स ने इस सुझाव की तारीफ की है। उनका मानना है कि इससे खर्च में कमी आएगी और कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी कम होंगे। इससे भारत अपने मुकाबले वाले देशों से आगे निकल सकता है।

EY के पार्टनर सुरेश नायर ने कहा कि मेथडोलॉजी को एक करने, दस्तावेजों को एकसमान रखने और दोनों डिपार्टमेंट्स के बीच बेहतर तालमेल से इंडस्ट्री के लिए कंप्लायंस कॉस्ट बहुत कम हो जाएगी। विवाद घटेंगे, बिजनेस को यकीन मिलेगा और रेवेन्यू भी बरकरार रहेगा। इससे भारत निवेश और मैन्युफैक्चरिंग के लिए और ज्यादा आकर्षक बनेगा।

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First Published - January 29, 2026 | 3:21 PM IST

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