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Economic Survey: बजट से पहले क्यों जारी की जाती है यह रिपोर्ट, जानिए आर्थिक सर्वेक्षण का मतलब

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बजट से पहले पेश होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर दिखाता है और सरकार की आगे की नीतियों का संकेत देता है

Last Updated- January 29, 2026 | 12:35 PM IST
Economic Survey 2026

Economic Survey 2026: हर साल बजट से ठीक पहले सरकार संसद में एक ऐसी रिपोर्ट रखती है, जो देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर दिखाती है। यह रिपोर्ट न तो वादा करती है और न ही घोषणाएं करती है। यह सिर्फ सच बताती है। इस दस्तावेज का नाम है आर्थिक सर्वेक्षण। यही रिपोर्ट बताती है कि बीते एक साल में देश की कमाई, खर्च और आम लोगों की हालत कैसी रही।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था का पूरा लेखा जोखा होता है। इसमें खेती, उद्योग, सेवा क्षेत्र, रोजगार, महंगाई, बैंकिंग, निर्यात आयात और विदेशी निवेश जैसे मुद्दों का साफ और सरल विश्लेषण किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह रिपोर्ट बताती है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है या दबाव में।

बजट से पहले क्यों पेश होती है Economic Survey रिपोर्ट?

सरकार बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण इसलिए लाती है ताकि हालात छुपे न रहें। जब यह साफ हो जाता है कि किन क्षेत्रों में कमजोरी है और कहां सुधार हुआ है, तब बजट में फैसले लेना आसान हो जाता है। इसी वजह से आर्थिक सर्वे को बजट की नींव माना जाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण सरकार को यह मौका देता है कि वह अपने पुराने फैसलों का असर देख सके। इससे पता चलता है कि कौन सी नीति काम आई और किसे बदलने की जरूरत है। यही रिपोर्ट बाजार, निवेशकों और आम लोगों को यह संकेत भी देती है कि सरकार आगे किस दिशा में सोच रही है।

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आर्थिक सर्वेक्षण कौन बनाता है

भारत का आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय बनाता है। इसे मंत्रालय के अंदर आर्थिक काम देखने वाला विभाग तैयार करता है। यह काम मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में होता है। अभी भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन हैं। सर्वे तैयार होने के बाद इसे वित्त मंत्री संसद में पेश करती हैं। यह सर्वे हर साल बजट से एक दिन पहले आता है और इसमें बताया जाता है कि पिछले साल देश की अर्थव्यवस्था कैसी रही और आगे क्या योजना है।

पिछले साल का Economic Survey क्या कहता था

पिछले साल आए आर्थिक सर्वेक्षण 2024 25 में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थिर बताया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि देश की जीडीपी करीब 6.4 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकती है। खेती, उद्योग और सेवा क्षेत्र तीनों में सुधार के संकेत दिए गए थे।

महंगाई में कुछ राहत दिखी थी, लेकिन खाने पीने की चीजों की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई थीं। बैंकिंग सेक्टर की हालत बेहतर बताई गई थी और खराब कर्ज काफी नीचे आ गए थे। विदेशी निवेश, निर्यात और रोजगार को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर पेश की गई थी।

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अब सबकी नजर अगले कदम पर

आर्थिक सर्वेक्षण सिर्फ बीते साल की कहानी नहीं सुनाता, बल्कि आने वाले बजट की दिशा भी दिखाता है। अब जब नया बजट (1 फरवरी 2026) पास आ रहा है, तो यही रिपोर्ट तय करेगी कि सरकार कहां खर्च बढ़ाएगी और किन क्षेत्रों पर खास ध्यान देगी।

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First Published - January 29, 2026 | 12:21 PM IST

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