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वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 8.4 फीसदी पर, NSO के आंकड़ों पर अर्थशास्त्रियों ने दी राय

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Nominal GDP का आकार बढ़ने से सरकार को वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटा GDP के 5.8 प्रतिशत के भीतर समेटने का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा।

Last Updated- February 29, 2024 | 10:16 PM IST
Indian economy

भारत की अर्थव्यवस्था की गाड़ी वृद्धि की पटरी पर पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। वित्त वर्ष 2023-24 की दिसंबर तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 8.4 प्रतिशत की तेज रफ्तार के साथ बढ़ा। पिछली तीन तिमाहियों में यह जीडीपी वृद्धि का सबसे तेज आंकड़ा रहा है। दिसंबर तिमाही में जीडीपी में शानदार बढ़ोतरी में ऊंचे कर संग्रह और सब्सिडी बांटने पर सरकार की सख्ती की अहम भूमिका रही। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने आज दिसंबर तिमाही में जीडीपी का आंकड़ा जारी किया।

दिसंबर तिमाही में जीडीपी की रफ्तार भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक रही। ब्लूमबर्ग के एक सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

एनएसओ ने गुरुवार को जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में वित्त वर्ष 2024 के लिए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी में एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, वित्त वर्ष 2023 के लिए वृद्धि दर का अनुमान पूर्व में अनुमानित 7.2 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया था। यह भी वित्त वर्ष 2024 के आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाने का प्रमुख कारण रहा।

वित्त वर्ष 2024 की पहली तीन तिमाहियों में जीडीपी की औसत वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है। यह इस बात का संकेत है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वृद्धि दर 5.9 प्रतिशत रह सकती है।

वित्त वर्ष 2024 में नॉमिनल जीडीपी अनुमानित 9.1 प्रतिशत तेजी के साथ 294 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में अनुमानित 8.9 प्रतिशत दर से यह थोड़ा अधिक रहेगा। नॉमिनल जीडीपी का आकार बढ़ने से सरकार को वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.8 प्रतिशत के भीतर समेटने का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा।

अचरज की बात यह रही कि आधार मूल्यों पर सकल मूल्य वर्द्धन (GVA) विश्लेषकों के अनुमान के अनुसार ही 6.5 प्रतिशत रहा। सब्सिडी पर होने वाले व्यय में कमी और शुद्ध अप्रत्यक्ष करों में दमदार बढ़ोतरी का जीवीए में अहम योगदान रहा।

इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘यह व्यापक अंतर इस तिमाही में शुद्ध अप्रत्यक्ष करों की वृद्धि के छह तिमाहियों के उच्चतम स्तर 32 फीसदी तक पहुंचने के बाद आया है और इसे अधिक समय तक बरकरार रहने की संभावना नहीं है। हमारे विचार से आर्थिक गतिविधि की रफ्तार को समझने के लिए जीवीए वृद्धि के रुझान को देखना अधिक महत्त्वपूर्ण हो सकता है।’

दिसंबर तिमाही के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में लगातार दूसरी तिमाही में दो अंकों (11.6 फीसदी) में वृद्धि जारी रही क्योंकि कम इनपुट लागत के कारण कंपनियों का लाभ मार्जिन मजबूत रहा। तिमाही के दौरान सेवाओं में वृद्धि क्रमिक रूप से 7 फीसदी की दर से बढ़ी। इससे वृद्धि को मुख्य तौर पर रफ्तार मिली। अल नीनो के कारण मॉनसूनी बारिश असमान होने के कारण दिसंबर तिमाही में कृषि उत्पादन में 0.8 फीसदी की गिरावट की आशंका है।

इंडिया रेटिंग्स के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि दिसंबर तिमाही के लिए अनुकूल आधार के अलावा एक अन्य कारक से जीडीपी वृद्धि को रफ्तार मिली और वह कारक है उद्योग के लिए इनपुट लागत में नरमी।

तिमाही के दौरान निजी खपत पर खर्च में वृद्धि कमजोर रही। तीसरी तिमाही के दौरान इसमें 3.5 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सरकारी खर्च में 3.2 फीसदी का संकुचन दिखा।

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First Published - February 29, 2024 | 10:16 PM IST

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