पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन आयात में व्यवधान, साथ ही पेट्रोल और डीजल पर सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती भारत की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रही है। वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव वी. वी. वुआलनम ने आज ये बातें कहीं। हालांकि उन्होंने राजकोषीय विवेक के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
अशोक विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वुआलनम ने कहा, ‘वित्तीय दबाव वास्तव में बहुत बड़ा है लेकिन पूंजीगत व्यय सरकार की प्राथमिकता है और हम चाहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि यह बजट अनुमान 12 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर हो। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में राजमार्ग, रेलवे, शिपिंग, बंदरगाह और शहरी विकास के क्षेत्र में मुख्य रूप से पूंजीगत खर्च होगा।
व्यय सचिव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं ने बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा की है मगर सरकार तेजी से हर स्थिति से निपटने में सक्रिय रही है। हालांकि प्रणालीगत बाधाएं भी हैं जहां आप वास्तव में सभी मौजूदा प्रभावों से निपट नहीं सकते या उन्हें दूर नहीं सकते।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में कटौती की है, जो वित्तीय नुकसान का जोखिम पैदा करता है। इस शुल्क कटौती से वित्त वर्ष 2027 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है। बजट में वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 फीसदी और वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.4 फीसदी पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ यानी तेज आर्थिक वृद्धि और कम मुद्रास्फीति का दौर अब बीत चुका है, व्यय सचिव ने कहा कि स्थिति वास्तव में बदल गई है। उदाहरण के लिए इस बदले परिदृश्य में आने वाले महीनों में हमारी सकल कर प्राप्तियों में कितनी वृद्धि होगी यह बड़ा सवाल है।
इसी कार्यक्रम में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि बजट 2026-27 में घोषित विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बहीखाते से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करेगी, ताकि वे अपनी पूंजी का बेहतर उपयोग कर सकें। नागराजू ने कहा कि चूंकि बैंक लंबी अवधि के वित्तपोषण के लिए सही माध्यम नहीं हैं इसलिए इस अंतर को भरने के लिए बॉन्ड बाजार की आवश्यकता है। यह कंपनियों को लंबी अवधि की पूंजी का सीधा मार्ग देता है, मूल्य खोज में सुधार करता है और प्रतिस्पर्धा पैदा करता है।