पश्चिम एशिया संकट के कारण बीते महीने वस्तु निर्यात में 5 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट आई और यह 7.44 फीसदी घटकर 38.92 अरब डॉलर रहा। इस दौरान आयात में 6 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
हालांकि आयात में कमी के कारण व्यापार घाटा मार्च में कम होकर 9 महीने के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया। कच्चे तेल और सोने के आयात में उल्लेखनीय कमी के कारण मार्च में कुल आयात 6.51 फीसदी घटकर 59.59 अरब डॉलर रहा। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण अप्रैल का महीना भी निर्यात के लिए कठिन साबित हो सकता है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 0.93 फीसदी बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 441.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि आयात 7.45 फीसदी बढ़कर 775 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सोने और चांदी के आयात में उछाल के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर रहा।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि देश के वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 4.22 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है और यह 2025-26 में 860.09 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 825.26 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातक मजबूती दिखा रहे हैं और सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर रहे हैं।
भारत हर महीने पश्चिम एशिया को 6 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात करता है। लेकिन 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा आई, जिससे इस क्षेत्र को निर्यात घटकर लगभग 2.0 से 2.5 अरब डॉलर रह गया।
निर्यातकों की संस्था फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, ‘वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और मांग में उतार-चढ़ाव के बीच निर्यात का आंकड़ा 860 अरब डॉलर पार करना बड़ी उपलब्धि है। यह भारतीय निर्यातकों की मजबूती को बताता है।’