भारत की अर्थव्यवस्था इन दिनों ऐसे दौर से गुजर रही है जहां एक तरफ ग्रोथ के मौके हैं, तो दूसरी तरफ कुछ संकेत चिंता भी बढ़ा रहे हैं। खासकर विदेशी निवेश में कमी और पैसा बाहर जाने का ट्रेंड अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर आने वाले समय में देश की आर्थिक रफ्तार पर पड़ेगा।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट में मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वित्त वर्ष 2027 में ट्रेड ग्रोथ बहुत तेज नहीं रहने वाली है, जबकि विदेशी निवेश और रुपये पर भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद भी जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार FY27 में भारत का निर्यात करीब 5 से 5.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है, जबकि आयात 6.5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। इसका मतलब है कि आयात की रफ्तार निर्यात से ज्यादा रहेगी, जिससे व्यापार घाटा बना रह सकता है। SBI रिसर्च का कहना है कि मर्चेंडाइज ट्रेड में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है और यह अगले साल भी दबाव में रह सकता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहेगा, जबकि चीन सबसे बड़ा आयात स्रोत रहेगा। इसके अलावा स्पेन, वियतनाम और हांगकांग जैसे नए बाजार धीरे-धीरे उभर सकते हैं।
| वर्ष | एफपीआई शुद्ध निवेश (अरब डॉलर) |
|---|---|
| 2008-09 | -9.8 |
| 2010-11 | 32.2 |
| 2011-12 | 18.9 |
| 2012-13 | 31.0 |
| 2013-14 | 45.7 |
| 2015-16 | -2.5 |
| 2017-18 | 22.5 |
| 2018-19 | -5.5 |
| 2020-21 | 36.2 |
| 2021-22 | -16.0 |
| 2023-24 | 41.0 |
| 2024-25 | 2.7 |
| 2025-26 | -16.6 |
स्रोत: आईएमएफ जीएफएसआर (अप्रैल 2026)
रिपोर्ट में बताया गया है कि FY26 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI का आउटफ्लो करीब 16.6 अरब डॉलर रहा, जो 1991 के बाद सबसे ज्यादा है। हालांकि आगे कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन यह काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट यह भी कहती है कि ईरान से जुड़े तनाव के दौरान निवेशकों की प्रतिक्रिया पहले के बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में थोड़ी सीमित रही है।
| वर्ष | नेट एफडीआई | कुल निवेश (इनफ्लो) | पैसा बाहर गया (रिपैट्रिएशन/डिसइन्वेस्टमेंट) | विदेशी निवेश बाहर (Outward FDI) |
|---|---|---|---|---|
| 2019-20 | 43.0 | 74.4 | 18.4 | 13.0 |
| 2020-21 | 44.0 | 82.0 | 27.0 | 11.0 |
| 2021-22 | 38.6 | 84.8 | 28.6 | 17.6 |
| 2022-23 | 28.0 | 71.4 | 29.3 | 14.0 |
| 2023-24 | 10.2 | 71.3 | 44.5 | 16.7 |
| 2024-25 | 1.0 | 80.6 | 51.5 | 28.2 |
| 2024-25 (अप्रैल-जनवरी) | 2.2 | 69.2 | 46.5 | 20.5 |
| 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) | 1.7 | 79.3 | 49.5 | 28.1 |
सोर्स: RBI
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नेट एफडीआई लगातार पांच महीने से निगेटिव है। जनवरी 2026 में करीब 1.4 अरब डॉलर का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसकी वजह यह है कि विदेशी कंपनियां निवेश से ज्यादा पैसा वापस ले जा रही हैं।
अप्रैल से जनवरी 2026 के बीच कुल 79.3 अरब डॉलर का निवेश आया, लेकिन लगभग उतना ही पैसा बाहर भी चला गया। इसी कारण नेट एफडीआई सिर्फ 1.7 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले कम है।
हालांकि आगे उम्मीद जताई गई है कि FY25 में 1 अरब डॉलर से बढ़कर FY27 तक नेट एफडीआई करीब 3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय कंपनियां विदेशों में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। इससे भी देश में नेट एफडीआई कम हो रहा है, क्योंकि पैसा बाहर जा रहा है।