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सात साल बाद ईरान से आया कच्चा तेल: पारादीप और सिक्का बंदरगाह पहुंचे 40 लाख बैरल तेल लदे दो टैंकर

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सात साल के लंबे अंतराल के बाद, दो बड़े जहाजों के जरिए करीब 40 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल भारत के पारादीप और सिक्का बंदरगाह पहुंच गया है

Last Updated- April 13, 2026 | 10:10 PM IST
Oil Tanker
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी की हालिया धमकी के बावजूद सोमवार को लगभग सात साल के अंतराल के बाद ईरान से कच्चे तेल का पहला शिपमेंट भारत आया है। लगभग 20-20 लाख बैरल कच्चा तेल लदे दो जहाजों– एमटी जया और एमटी फेलिसिटी ने भारतीय तट के पास लंगर डाल दिया है। एक जहाज ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा है जबकि दूसरा गुजरात के सिक्का बंदरगाह के पास रुका है।

यह मार्च में अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार के दोबारा शुरू होने का संकेत है। पारादीप बंदरगाह के अधिकारियों ने बताया कि कुराकाओ ध्वज वाला एमटी जया बहुत बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज है। इसमें ईरान के खर्ग द्वीप से 2,77,321 टन ईरानी कच्चा तेल लाया गया है। इसने दोपहर लगभग 3:18 बजे सिंगल पॉइंट मूरिंग (एसपीएम) प्रणाली से लंगर डाला। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘यह शिपमेंट आईओसीएल की पारादीप रिफाइनरी के लिए है।’

ट्रंप प्रशासन द्वारा 20 मार्च को ऊर्जा आपूर्ति दबाव कम करने के लिए समुद्री मार्ग से ईरानी तेल की खरीद के लिए दी गई 30 दिन की छूट के बाद इन दोनों जहाजों ने भारत की ओर अपनी यात्रा शुरू की थी। इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने पु​ष्टि करते हुए बताया कि पारादीप में एक जहाज पहुंच गया है, जो 2019 के बाद भारत पहुंचने वाला पहला ईरानी कच्चा तेल शिपमेंट है। भंडारण टैंकों में भरे जाने से पहले कच्चे तेल के घनत्व, सल्फर सामग्री और अशुद्धता स्तर सहित प्रारंभिक गुणवत्ता जांच की जाएगी।

एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘तट से दूर लंगर डाले हुए सुपरटैंकर को कच्चा तेल उतारने के लिए एसपीएम प्रणाली से जोड़ा जाएगा और इसे पूरी तरह  डिस्चार्ज करने में 48-60 घंटे लगेंगे। इसके बाद कच्चे तेल को आईओसीएल के व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से वितरित किया जाएगा ताकि पारादीप, हल्दिया, बरौनी और बोंगाईगांव में इसकी पांच रिफाइनरियों को भेजा जा सके।’

इसी तरह ईरान के ध्वज वाला एमटी फेलिसिटी सिक्का के पास लंगर डाले हुए है, जिसमें 2.7 लाख टन से अधिक कच्चा तेल है, जो संभवतः बीपीसीएल और आरआईएल के लिए है। हालांकि बीपीसीएल और आरआईएल से इस बात की पुष्टि के लिए संपर्क नहीं किया जा सका कि कच्चा तेल उनकी रिफाइनरियों में जाएगा या नहीं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि सिक्का दोनों कंपनियों के लिए कार्गो संभालने का प्रमुख बंदरगाह है।

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First Published - April 13, 2026 | 10:03 PM IST

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