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चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 30% पार, अप्रैल-जुलाई में कर राजस्व घटा और पूंजीगत व्यय ने बढ़ाई सरकार की चिंता

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केंद्र सरकार ने अप्रैल-जुलाई 2025 में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 30% तक पहुंचाया, कर राजस्व घटा जबकि पूंजीगत व्यय और गैर-कर आय में बढ़ोतरी दर्ज हुई।

Last Updated- August 29, 2025 | 10:11 PM IST
fiscal deficit
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गया। शुक्रवार को लेखा महानियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार यह वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-जुलाई अवधि के दौरान दर्ज 2.8 लाख करोड़ रुपये से 17.2 प्रतिशत बढ़कर 4.7 लाख करोड़ रुपये हो गया।

वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जुलाई अवधि में शुद्ध कर राजस्व बजट अनुमानों का 23.3 प्रतिशत रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसमें 27.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।  

ईवाई इंडिया में मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा,‘आने वाले समय में निर्यात के लिए चुनौतियां बरकरार रह सकती हैं। इसे देखते हुए भारत सरकार को पूंजीगत व्यय कर राजस्व बढ़ाकर समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए राजकोषीय उपाय जारी रखने होंगे।’ विशेषज्ञों ने कहा कि कर दाखिल करने की आखिरी तारीख बढ़ाने और प्रतिकूल आधार के कारण जुलाई 2025 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह में गिरावट के कारण उक्त महीने में सकल कर राजस्व का आंकड़ा फिसल गया।

महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई अवधि में शुद्ध कर राजस्व में 7.5 प्रतिशत की कमी आई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अनुमान से अधिक लाभांश मिलने से गैर-कर राजस्व में सालाना आधार पर 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जुलाई अवधि में पूंजीगत व्यय बजट अनुमानों का 30.9 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32.7 प्रतिशत अधिक है।

अप्रैल-जुलाई की अवधि में राजस्व व्यय वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमानों का 30.8 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा,‘वित्त वर्ष 2025 का बजट जुलाई 2024 में पेश किया गया था जिससे शेष महीनों में व्यय में काफी तेजी देखी गई थी। इसे देखते हुए आने वाले महीनों में सालाना आधार पर वृद्धि दर कम रह सकती है। पूंजीगत व्यय अब वित्त वर्ष 2026 के शेष आठ महीनों में 2 प्रतिशत तक घट सकता है मगर तब भी भी लक्ष्य तक पहुंच सकता है।‘

इक्रा का अनुमान है कि सरकार के पास वित्त वर्ष 2026 में 0.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की गुंजाइश है जिनका इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमान से इतर पूंजीगत व्यय बढ़ाने, निर्यातकों को आर्थिक राहत देने या अप्रत्यक्ष करों में कमी की भरपाई करने में हो सकता है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सरकार का कुल व्यय बजट अनुमानों का 30.9 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत से अधिक है।

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First Published - August 29, 2025 | 9:54 PM IST

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