वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान घटा दिया है। एजेंसी का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण बढ़ी महंगाई और ऊर्जा संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इसी वजह से चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.7 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया गया है।
फिच के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का सबसे ज्यादा असर FY27 की दूसरी और तीसरी तिमाही में देखने को मिल सकता है। युद्ध के चलते कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में हाल के हफ्तों में 4 से 5 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे लोगों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ेगा और उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, एजेंसी का कहना है कि घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि की मुख्य ताकत बनी रहेगी। साथ ही वास्तविक आयात में कमी आने से शुद्ध बाहरी मांग का योगदान भी सकारात्मक रह सकता है।
फिच ने कहा कि FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की दर से बढ़ी थी, लेकिन बढ़ती कीमतों और उपभोक्ता खर्च में संभावित नरमी के कारण FY27 में विकास दर कुछ धीमी पड़ सकती है। हालांकि, पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में मजबूती अर्थव्यवस्था को सहारा देती रहेगी।
रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि ऊर्जा संकट का असर कम होने के बाद FY28 में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से गति पकड़ सकती है। मजबूत उपभोक्ता मांग और निवेश के दम पर उस वर्ष GDP वृद्धि दर 6.7 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसके बाद FY29 में विकास दर 6.4 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है।
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर चुका है। वहीं महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया गया है।
फिच ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अपने अनुमान में कटौती की है। एजेंसी ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 2.6 फीसदी से घटाकर 2.4 फीसदी कर दिया है।
फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुआ तेल संकट दुनिया की आर्थिक संभावनाओं पर दबाव बना रहा है और इससे जोखिम बढ़ गए हैं। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा निवेश आर्थिक गतिविधियों को कुछ हद तक सहारा दे रहा है, खासकर एशियाई देशों में।
एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले 14 सप्ताह से बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। फिच का अनुमान है कि यह मार्ग जुलाई से पहले दोबारा पूरी तरह नहीं खुल पाएगा। ऐसे में तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।