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अमेरिका-ईरान तनाव से भारत को झटका, Fitch ने FY27 ग्रोथ अनुमान 6.4% किया

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अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़े तेल संकट और महंगाई के जोखिम के बीच फिच ने भारत की FY27 जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.4% कर दिया है।

Last Updated- June 09, 2026 | 1:33 PM IST
Fitch Ratings
Representative image

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान घटा दिया है। एजेंसी का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण बढ़ी महंगाई और ऊर्जा संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इसी वजह से चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.7 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया गया है।

फिच के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का सबसे ज्यादा असर FY27 की दूसरी और तीसरी तिमाही में देखने को मिल सकता है। युद्ध के चलते कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में हाल के हफ्तों में 4 से 5 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे लोगों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ेगा और उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, एजेंसी का कहना है कि घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि की मुख्य ताकत बनी रहेगी। साथ ही वास्तविक आयात में कमी आने से शुद्ध बाहरी मांग का योगदान भी सकारात्मक रह सकता है।

FY26 के मुकाबले धीमी रह सकती है वृद्धि

फिच ने कहा कि FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की दर से बढ़ी थी, लेकिन बढ़ती कीमतों और उपभोक्ता खर्च में संभावित नरमी के कारण FY27 में विकास दर कुछ धीमी पड़ सकती है। हालांकि, पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में मजबूती अर्थव्यवस्था को सहारा देती रहेगी।

रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि ऊर्जा संकट का असर कम होने के बाद FY28 में भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से गति पकड़ सकती है। मजबूत उपभोक्ता मांग और निवेश के दम पर उस वर्ष GDP वृद्धि दर 6.7 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसके बाद FY29 में विकास दर 6.4 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है।

RBI भी घटा चुका है ग्रोथ अनुमान

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर चुका है। वहीं महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बढ़ा दबाव

फिच ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अपने अनुमान में कटौती की है। एजेंसी ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 2.6 फीसदी से घटाकर 2.4 फीसदी कर दिया है।

फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुआ तेल संकट दुनिया की आर्थिक संभावनाओं पर दबाव बना रहा है और इससे जोखिम बढ़ गए हैं। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा निवेश आर्थिक गतिविधियों को कुछ हद तक सहारा दे रहा है, खासकर एशियाई देशों में।

एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले 14 सप्ताह से बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। फिच का अनुमान है कि यह मार्ग जुलाई से पहले दोबारा पूरी तरह नहीं खुल पाएगा। ऐसे में तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

एजेंसी ने वर्ष 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान बढ़ाकर 87 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो मार्च में जारी 70 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है। फिच का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक आर्थिक विकास के लिए चुनौती बन सकती है, हालांकि इसकी तीव्रता 1970 के दशक के तेल संकट जैसी नहीं होगी।

1970 के दशक जैसा संकट नहीं

फिच के अनुसार, 1979 में वास्तविक तेल कीमतें मौजूदा मूल्यों के हिसाब से 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और उस समय वैश्विक तेल बाजार में ओपेक की भूमिका भी काफी अलग थी। इसके अलावा, 1980 के मुकाबले विश्व जीडीपी में तेल खपत की हिस्सेदारी अब लगभग आधी रह गई है। ऐसे में मौजूदा स्थिति गंभीर जरूर है, लेकिन पुराने तेल संकट जैसी व्यापक आर्थिक उथल-पुथल की संभावना कम है।

भारत में बढ़ रहा महंगाई का दबाव

एजेंसी ने कहा कि भारत में उपभोक्ता महंगाई दर में अभी तक बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी है, लेकिन कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 8.3 प्रतिशत सालाना रही, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई बढ़कर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई।

फिच का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई धीरे-धीरे बढ़ेगी और कैलेंडर वर्ष के अंत तक 5.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके पीछे आधार प्रभाव के साथ-साथ ऊर्जा कीमतों में तेजी को प्रमुख कारण बताया गया है।

कमजोर मानसून और गर्मी बढ़ा सकते हैं जोखिम

फिच ने चेतावनी दी है कि सामान्य से कम बारिश की आशंका और देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी महंगाई को और बढ़ा सकती है। मौसम संबंधी चुनौतियां खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

आरबीआई बढ़ा सकता है ब्याज दर

भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल में अपनी नीतिगत ब्याज दर 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखी थी। हालांकि फिच का मानना है कि बढ़ते मुद्रास्फीति दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक अपने रुख में बदलाव कर सकता है। एजेंसी ने अनुमान जताया है कि आरबीआई इस साल एक बार ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत तक ले जा सकता है।

रुपये में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

फिच ने भारतीय मुद्रा को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है। एजेंसी का कहना है कि वर्ष के शेष हिस्से में रुपये में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं दिखती। फिच ने चालू वित्त वर्ष के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 97.50 रहने का अनुमान जताया है।

एजेंसी ने वर्ष 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान बढ़ाकर 87 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो मार्च में जारी 70 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है। फिच का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक आर्थिक विकास के लिए चुनौती बन सकती है, हालांकि इसकी तीव्रता 1970 के दशक के तेल संकट जैसी नहीं होगी।

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First Published - June 9, 2026 | 1:32 PM IST

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