फरवरी में विदेश से धन की आवक बढ़ी। इस माह में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सकारात्मक रहा जबकि यह बीते छह महीनों से निरंतर ऋणात्मक था। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार सकल आवक में वृद्धि और प्रत्यावर्तन में कमी के कारण फरवरी में शुद्ध एफडीआई में वृद्धि हुई। फरवरी में शुद्ध एफडीआई 4.6 अरब डॉलर थी। हालांकि यह फरवरी 2025 में 70.3 करोड़ डॉलर के साथ नकारात्मक थी। जनवरी, 2026 में शुद्ध एफडीआई 1.4 अरब डॉलर नकारात्मक थी। फरवरी, 2026 में प्रत्यावर्तन गिरकर 1.7 अरब डॉलर रहा जबकि यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में 2.5 अरब डॉलर था। जनवरी 2026 में प्रत्यावर्तन लगभग 5 अरब डॉलर था। सकल आवक एफडीआई फरवरी में बढ़कर 8.98 अरब डॉलर हो गई जो एक वर्ष पहले 5.56 अरब डॉलर थी।
इस माह के दौरान 1.7 अरब डॉलर की स्वदेश वापस आई जबकि .यह फरवरी 2025 में 2.5 अरब डॉलर थी। शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बहिर्गमन (आउटवर्ड) में वार्षिक आधार पर 31.03 प्रतिशत की गिरावट आई और फरवरी 2026 में यह 3.77 अरब डॉलर से घटकर 2.63 अरब डॉलर रह गया। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 18.1 प्रतिशत बढ़कर 88.3 अरब डॉलर हो गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 74.7 अरब डॉलर था। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 6.3 अरब डॉलर हो गया जो पिछले वर्ष 1.5 अरब डॉलर था। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान सकल और शुद्ध दोनों ही मायनों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा।
फरवरी में लगातार छह महीनों तक नकारात्मक रहने के बाद शुद्ध एफडीआई सकारात्मक हो गया, जिसका कारण सकल निवेश में वृद्धि और प्रत्यावर्तन में कमी थी। फरवरी में लगभग 75 प्रतिशत बहिर्गामी एफडीआई सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन की ओर था। विनिर्माण, कंप्यूटर सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं और संचार सेवाएं मिलकर 2025-26 के दौरान अब तक (फरवरी तक) कुल इक्विटी निवेश के दो-तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।