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अर्थव्यवस्था से लेकर महंगाई, स्टॉक मार्केट और आयात-निर्यात तक; US Iran युद्ध का भारत पर क्या पड़ेगा असर?

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ईरान की धमकी के बाद कई बीमा कंपनियों ने जहाजों को बीमा देना बंद कर दिया है, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

Last Updated- March 03, 2026 | 4:42 PM IST

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों, महंगाई, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, इस तनाव से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं या होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर भारत की आर्थिक वृद्धि, महंगाई दर, रुपये की स्थिति और आयात-निर्यात संतुलन पर साफ दिखाई दे सकता है।

अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर ?

फिच ग्रुप की कंपनी बीएमआई ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है, तो ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। इससे भारत की जीडीपी में 0.5 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

ईरान की धमकी के बाद कई बीमा कंपनियों ने जहाजों को बीमा देना बंद कर दिया है, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत अपनी 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। अगर तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ सकती है।

Also Read: US-Iran Conflict: ईरान में भारतीयों को घर में रहने की सलाह, दूतावास ने जारी की नई एडवाइजरी

भारत में बढ़ सकती है महंगाई?

आईसीआईसीआई बैंक ग्लोबल मार्केट की रिपोर्ट के अनुसार, तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये, महंगाई और आर्थिक बढ़त पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर 2005 से 2014 के बीच जब कच्चा तेल औसतन 82 डॉलर प्रति बैरल रहा, तब महंगाई भी ऊंची रही और औसतन करीब 8.7 प्रतिशत तक पहुंची। वहीं 2015 से 2025 के दौरान तेल की औसत कीमत घटकर 69 डॉलर रही, तो महंगाई भी कम होकर करीब 5 प्रतिशत रही।

बैंक का अनुमान है कि अगर तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल और बढ़ती है, तो खुदरा महंगाई में करीब 0.50 से 0.60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि जब तक तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक आर्थिक विकास पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

स्टॉक मार्केट पर अमेरिका ईरान युद्ध का असर?

मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ रहा है। इसमें भारत भी शामिल है। भारतीय बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सोमवार को करीब 1.25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट लेकर बंद हुए।

ब्रोकरेज कंपनी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि अगर यह तनाव जारी रहता है, तो निफ्टी में गिरावट आ सकती है। उनका अनुमान है कि निफ्टी 24,500–25,000 के स्तर तक आ सकता है। अगर यह संघर्ष 1–2 हफ्ते से ज्यादा चला, तो बाजार और नीचे जा सकता है क्योंकि भारत तेल आयात पर काफी निर्भर है।

साथ ही शेयर बाजार की वैल्यूएशन पहले से हाई है और विदेशी निवेशक पैसा निकाल सकते है। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि अगर हालात एक हफ्ते में सामान्य हो जाते हैं, तो बाजार पहले की तरह जल्दी संभल सकता है।

महंगा हो सकता है कच्चा तेल?

अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधा बन सकता है। यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही कम हो जाती है या पूरी तरह थम जाती है, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने अपनी रिपोर्ट में यही चेतावनी दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च को केवल पांच तेल टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि हाल के दिनों में रोजाना करीब 60 टैंकर गुजर रहे थे। यह जानकारी ‘कमोडिटीज एट सी’ के आंकड़ों पर आधारित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर टैंकरों की आवाजाही में यह गिरावट एक सप्ताह तक बनी रहती है, तो इसे ऐतिहासिक माना जाएगा। यदि यह स्थिति इससे अधिक समय तक जारी रहती है, तो यह तेल बाजार के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है। ऐसे में सीमित आपूर्ति के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देगा।

आयात-निर्यात पर क्या पड़ेगा असर?

भारत और ईरान के बीच व्यापार में कृषि उत्पाद, तैयार सामान और कच्चा माल शामिल हैं। भारत मुख्य रूप से ईरान को बासमती चावल जैसे अनाज, खाद्य अवशेष और पशु चारा, कॉफी और चाय, खाने योग्य फल और मेवे, मशीनों के पुर्जे, कार्बनिक रसायन और कुछ दवाइयां निर्यात करता है। वर्ष 2024 में इनका कुल मूल्य लगभग 1.25 अरब डॉलर रहा।

वहीं, भारत ईरान से तुलनात्मक रूप से कम आयात करता है। ईरान से मुख्य रूप से कार्बनिक रसायन, पिस्ता और बादाम जैसे खाने योग्य मेवे तथा कुछ विशेष उत्पाद आयात किए जाते हैं। इन आयातों का कुल मूल्य करीब 1 अरब डॉलर है। प्रतिबंधों के कारण ईरान से ऊर्जा उत्पादों का आयात लगभग बंद हो चुका है, इसलिए आयात का बड़ा हिस्सा रसायन और खाद्य उत्पादों तक सीमित है।

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First Published - March 3, 2026 | 4:35 PM IST

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