प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 से 20 मई तक पांच देशों की विदेश यात्रा के दौरान 50 बड़ी वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात की। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इन कंपनियों द्वारा भारत में निवेश करने और अपनी व्यापार विस्तार योजनाओं के लिए लगभग 40 अरब डॉलर की राशि का संकल्प जताया गया है।
संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री ने जिन 50 से अधिक सीईओ से मुलाकात की, उनकी कंपनियों में से कई बड़ी संख्या पहले से ही भारत में काफी अधिक निवेश कर चुकी हैं। उनके भारत में कुल निवेश और व्यापारिक जुड़ाव लगभग 180 अरब डॉलर के आसपास है।जायसवाल ने कहा, ‘वे देश में नए निवेश भी कर रहे हैं ताकि भारत की विकास गाथा का लाभ उठा सकें। उनके कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में निवेश शामिल हैं।’
प्रधानमंत्री गुरुवार को अपनी विदेश यात्रा से लौटे। भारत ने ऊर्जा, रक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौते किए। 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा के पहले चरण में भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, दीर्घकालिक तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आपूर्ति, रक्षा और शिपिंग से जुड़े कई ऐतिहासिक समझौते किए। अबू धाबी ने भारत में कुल 5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया।
गुरुवार दोपहर नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा से कुल 57 परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा निर्माण और निर्यात को मजबूत करेगी।गोयल ने बताया कि भारत ने तीन मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाया है जिनमें यूएई, चार देशों का यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री की यात्रा ने हमारे निर्यातकों के लिए कई नए अवसर खोले हैं और भारत में बड़े निवेश की नींव रखी है।’ प्रधानमंत्री ने ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया और आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के अपने समकक्षों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव रोम में मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया।
जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनकी मुख्य विशेषता रक्षा औद्योगिक सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता थी, जिसमें प्रौद्योगिकी साझेदारी, डिजाइन और रक्षा उपकरणों का साझा उत्पादन शामिल है। विशेष रूप से एरोस्पेस सिस्टम, हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, नौसैनिक हथियार और अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों में नए अवसर पैदा करना इसका हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि आभासी व्यापार गलियारा स्थापित करने पर भी चर्चा आगे बढ़ रही है।दोनों पक्षों ने भारत से इटली में नर्सों की गतिशीलता को सुगम बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इटली स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी का सामना कर रहा है। नेताओं ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने सहमति जताई कि इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए पहला आईएमईसी मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026 में होना चाहिए।
भारत-इटली रक्षा साझेदारी के संदर्भ में, अदाणी डिफेंस ऐंड एरोस्पेस लिमिटेड और इटली की लियोनार्डो एसपीए (पूर्व में फिनमेकानिका) ने हेलीकॉप्टरों की खरीद और स्वदेशीकरण तथा पायलट प्रशिक्षण के लिए साझेदारी की घोषणा की। भारतीय नौसेना ब्लैक शार्क टॉरपीडो फिनकांतिएरी-डब्ल्यूएएसएस से प्राप्त कर रही है। लियोनार्डो भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उद्यम का प्रस्ताव भी चर्चा में है ताकि सुपर रैपिड गन माउंट की आपूर्ति बढ़ाई जा सके और भारत में स्थानीय उत्पादन किया जा सके।
गोयल ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘बार-बार चुनाव हारने से उपजी हताशा और गुस्से’ के कारण प्रधानमंत्री की यात्राओं की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अब तक विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से 32 सम्मान प्राप्त हुए हैं और वे दुनिया के एकमात्र नेता हैं जिन्हें इतने सम्मान मिले हैं। इनमें यूएई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे इस्लामी देशों से मिले सम्मान भी शामिल हैं। गोयल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों की रक्षा की है, क्योंकि सरकार ने 2014 से अब तक उर्वरक पर सब्सिडी कम नहीं की है।