विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने शुक्रवार को प्रमुख 15 बैंकों को सोने और चांदी के आयात की अनुमति दे दी है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंडस्ट्रियल ऐंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीसीबी) सहित 15 प्रमुख बैंक को सोना और चांदी का आयात कर सकेंगे।
अनुमति पाने वाले अन्य बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया, डॉयचे बैंक, फेडरल बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक, आरबीएल बैंक और येस बैंक शामिल हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अधिकृत बैंकों की सूची अप्रैल 2026 से मार्च 2029 तक वैध रहेगी। इसके अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एसबीईआर बैंक को इसी अवधि के दौरान केवल सोने का आयात करने की अनुमति दी गई है।
एमके रिपोर्ट के मुताबिक अधिसूचना के इंतजार में सीमा शुल्क निकासी के बिना लगभग 5 टन सोना और 8 टन चांदी अटकी हुई थी, जो आम तौर पर प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत में जारी की जाती है। अब इस अधिसूचना के बाद बैंक सीमा शुल्क से इन खेपों को क्लियर कर सकेंगे। दुबई के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारत 5 प्रतिशत रियायती शुल्क पर (मानक 6 प्रतिशत) 200 टन तक सोने के आयात की अनुमति देता है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 72 अरब डॉलर के सोने का आयात किया, जो सालाना आधार पर 24 प्रतिशत अधिक है, जबकि चांदी का आयात 12.1 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 150 प्रतिशत बढ़ा है।
एमके की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘हम इसे एक अस्थायी बाधा के रूप में देखते हैं, न कि सराफा आयात को रोकने के लिए एक नीतिगत कदम के रूप में।’
खासकर अक्षय तृतीया से पहले हुई यह देरी सोने के बाजार के लिए व्यवधान के रूप में देखी गई, क्योंकि बैंकों द्वारा नया आयात न किए जाने से आपूर्ति कम हो गई। देरी के कारण मौजूदा स्टॉक से निकासी, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) रिडंपशन और उपलब्ध इन्वेंट्री महंगी हो सकती थी। बहरहाल बाजार के प्रतिभागियों को उम्मीद थी कि व्यवधान अल्पकालिक होगा।
डीजीएफटी अधिसूचना जारी होने के बाद टाइटन, कल्याण ज्वैलर्स इंडिया, तंगा मायिल ज्वेलरी, पीएन गाडगिल ज्वेलर्स, पीसी ज्वेलर, ब्लूस्टोन ज्वेलरी, और स्काई गोल्ड ऐंड डायमंड्स सहित आभूषण निर्माताओं के शेयरों में दिन के दौरान गिरावट आई। हालांकि उन्होंने बाद में गिरावट की भरपाई की और उनके शेयर बगैर घटबढ़ के या मामूली घटकर बंद हुए।